जन-जन के नेता,सरल स्वभाव के धनी महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी इन दिनों राज्य भ्रमण पर हैं।
कोश्यारी हर उस शख्स की हौंसला अफजाई कर रहे हैं जो किसी न किसी रूप में राज्य की तरक्की में योगदान तो दे ही रहे हैं साँथ ही ऐसी होनहार प्रतिभाएं कई घरों के चूल्हे भी जला रही हैं इसी कड़ी में भगत सिंह कोश्यारी भ्रमण के दौरान स्वामी विवेकानंद की तपस्थली काकड़ीघाट स्थित “पहाड़ी पिसी नूण” सेंटर पहुंचे यहाँ उन्होंने संदीप पाण्डे,सौरभ पंत व योगेंद्र चुफाल द्वारा स्थापित पहाड़ी पिसी नूण सेंटर की सराहना की।
भगत दा ने कहा हमारे बीच में आज ऐसे यूथ आइकॉन हैं जिनके पास इतने बेहतरीन आइडियाज हैं जिससे वो खुद अपने लिये आर्थिक सक्षमता के द्वार तो खोल ही रहे हैं साँथ ही कई लोगों को रोजगार से भी जोड़ रहे हैं।हमारे राज्य की जड़ी बूटियां,मसाले,मोटे अनाज यहाँ उत्पादित शहद और अन्य उत्पाद देश-विदेश में सुगंध और मिठास घोल रहे हैं साँथ ही यहाँ के उत्पाद सेहत का खजाना तो हैं हीं।
कोश्यारी ने कहा इन तीनों युवाओं की सोच और उसका यथार्थ स्वरुप पहाड़ी पिसी नूण सेंटर युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।
पूर्व राज्यपाल पहुंचे काकड़ीघाट स्थित पहाड़ी पिसी नूण सेंटर स्वरोजगार से जुड़ी महिलाओं की करी तारीफ
Related Post
Uncategorized
अंबेडकर नगर
अमेठी
अयोध्या
अरुणाचल प्रदेश
असम
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड
उन्नाव
एक्सक्लूसिव
कृषि
क्राइम
खास खबर
खेल
गुजरात
गोण्डा
गोवा
झारखंड
दिल्ली
देश
नवाबगंज
बलरामपुर
बहराइच
बाराबंकी
राजनीति
रायबरेली
लखनऊ
लखीमपुर खीरी
वजीरगंज
वॉयरल न्यूज़
श्रावस्ती
सीतापुर
सुल्तानपुर
हरदोई
Uncategorized
अंबेडकर नगर
अमेठी
अयोध्या
असम
आंध्र प्रदेश
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड
उन्नाव
एक्सक्लूसिव
ओड़ीशा
कृषि
केरल
क्राइम
खास खबर
खेल
गुजरात
गोण्डा
गोवा
छत्तीसगढ़
जम्मू एवं कश्मीर
झारखंड
तमिलनाडु
तेलंगाना
त्रिपुरा
दिल्ली
देश
नवाबगंज
नागालैंड
पंजाब
पश्चिम बंगाल
बलरामपुर
बहराइच
बाराबंकी
बिहार
मध्य प्रदेश
महाराष्ट्र
राजनीति
रायबरेली
लखनऊ
लखीमपुर खीरी
वजीरगंज
विदेश
वॉयरल न्यूज़
श्रावस्ती
सिक्किम
सीतापुर
सुल्तानपुर
हरदोई
हरियाणा
पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए….सनातन धर्म में 16 दिन का पितृपक्ष, सबसे संवेदनशील, सबसे सूक्ष्म दिनों का समय माना गया है। गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और मृत्यु के बाद के विज्ञान का ग्रंथ है, वह स्पष्ट कहता है – इन 16 दिनों में आपका शरीर केवल आपका नहीं रहता, आप अपने पितरों के लिए एक “पात्र” बन जाते हैं।
Uncategorized
अंबेडकर नगर
अमेठी
अयोध्या
अरुणाचल प्रदेश
असम
आंध्र प्रदेश
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड
उन्नाव
एक्सक्लूसिव
ओड़ीशा
कर्नाटक
कृषि
केरल
क्राइम
खास खबर
खेल
गुजरात
गोण्डा
गोवा
छत्तीसगढ़
जम्मू एवं कश्मीर
झारखंड
तमिलनाडु
तेलंगाना
त्रिपुरा
दिल्ली
देश
नवाबगंज
नागालैंड
पंजाब
पश्चिम बंगाल
बलरामपुर
बहराइच
बाराबंकी
बिहार
मणिपुर
मध्य प्रदेश
महाराष्ट्र
मिज़ोरम
मेघालय
राजनीति
राजस्थान
रायबरेली
लखनऊ
लखीमपुर खीरी
वजीरगंज
विदेश
वॉयरल न्यूज़
श्रावस्ती
सीतापुर
सुल्तानपुर
हरदोई
हरियाणा
