नेहा सिंह अयोध्या धाम ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट ( ashcharychakit live TV news ) गुरु पूर्णिमा पर अयोध्या धाम में भोर से ही भक्ति भाव से सराबोर हो उठा। श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया और नागेश्वरनाथ महादेव का जलाभिषेक ए किया। शहर के प्रमुख मंदिरों राम जन्मभूमि, हनुमानगढ़ी, म मणिराम दास छावनी, श्रीरामवल्लभाकुंज, दशरथ महल, ए अशर्फी भवन, तुलसीदास जी की छावनी, हनुमत निवास, बर सियाराम किला, बावन मंदिर, दिगंबर अखाड़ा, उत्तर तोताद्रि में मठ, गहोई मंदिर समेत एक हजार से अधिक मंदिरों में महोत्सव की धूम रही। संत-महंतों और श्रद्धालुओं ने अपने-अपने गुरुओं की पूजा कर गुरुतत्व की महिमा का गुणगान किया।दशरथ महल के महंत विंदुगद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य ने, ने कहा, गुरु वह सेतु हैं जो ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त की करते हैं। यह दिन उनके प्रति कृतज्ञता अर्पण का है। हनुमत में निवास के आचार्य डॉ. मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा, गुरु हमारे ए अज्ञान और संशयों से बाहर निकालकर हमें आत्मबोध कराते हैं। यही उनका दिव्य कार्य है। रामलला सदन के महंत जगदगुरुरामानुजाचार्य डॉ. राघवाचार्य ने कहा, आषाढ़ पूर्णिमा को वेदव्यास का प्राकट्य हुआ, जिन्होंने चार वेद, 18 पुराणों का ज्ञान दिया। इसी कारण आज का दिन ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहलाता है। गुरु का पूजन प्रतिदिन होना चाहिए, पर आज का दिन विशेष रूप से आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिवस है। गुरु पूर्णिमा पर रामनगरी एक बार फिर श्रद्धा, आस्था और आत्मिक चेतना का जीवंत केंद्र बन गई।विभिन्न प्रांतों से वन कुटीर पहुंचे भक्तों ने उल्लासपूर्वक मनाया गुरु पूर्णिमा पर्वश्रीराम वन कुटीर आश्रम हड़ियाकोल में रोगहरण श्री हनुमान की छत्रछाया में गुरू पूर्णिमा उत्सव बहुत ही उल्लास पूर्वक मनया गया। आश्रम के सेवादार मनीष मेहरोत्रा ने बताया कि श्रीराम वन कुटीर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष भगवान दास महाराज एवं उपाध्यक्ष विष्णु दास, के द्वारा बाबा बद्री दास (जंगली बाबा) आश्रम के संस्थापक पूज्य स्वामी रामदास महाराज, स्वामी राम ज्ञान दास महाराज का पूजन-अर्चन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। देश के विभिन्न प्रांतों से आए हुए स्वामी जी के शिष्यों ने महाराज का पूजन कर मानव सेवा करने का संकल्प लिया। आश्रम में संचालित भगवान श्री राम विद्या मंदिर उ. मा. विद्यालय के बच्चों ने भी स्वामी जी की प्रतिमा पर फूल अर्पित कर आर्शिवाद माँगा। प्रत्येक गुरुवार को चलने वाली स्वामी विवेकानंद पाली क्लीनिक आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ के डॉक्टरों ने वीतरागी संत रामकृष्ण परमहंस एवं माँ शारदा के चित्रों पर फूल अर्पित कर गुरु पूजन किया।
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गुरु पूर्णिमा के पवित्र पावन पर्व सरयू स्नान, मंदिरों में महोत्सव, संतों के मुख से गूंजा गुरु तत्व का गौरवगानआध्यात्मिक आस्था और श्रद्धा से गूंज उठी रामनगरी
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पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए….सनातन धर्म में 16 दिन का पितृपक्ष, सबसे संवेदनशील, सबसे सूक्ष्म दिनों का समय माना गया है। गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और मृत्यु के बाद के विज्ञान का ग्रंथ है, वह स्पष्ट कहता है – इन 16 दिनों में आपका शरीर केवल आपका नहीं रहता, आप अपने पितरों के लिए एक “पात्र” बन जाते हैं।
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