प्रदीप कुमार गुप्ता (editor in chief ) रूबी सोनी( district head ) अयोध्या धाम फैज़ाबाद कार्यालय । ( ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट )
सनातन धर्म विश्वास औरआस्था का पर्व 84 कोसी परिक्रमा का आगाज 3 अप्रैल से होने जा रहा है, लेकिन प्रशासन के दावों के उलट जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। परिक्रमा के पहले अहम पड़ाव, श्री श्रृंगी ऋषि आश्रम में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव देखने को मिल रहा है, जिससे आगामी दिनों में यहाँ जुटने वाले हजारों श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़नी तय मानी जा रही हैं। अंधेरे में आश्रम, प्यासे रहेंगे श्रद्धालुआश्रम परिसर में बिजली, पानी और शौचालय जैसी प्राथमिक सुविधाओं की स्थिति दयनीय है। पेयजल व्यवस्था का आलम यह है कि परिसर में लगे 7 हैंडपंपों में से अधिकांश या तो खराब पड़े हैं या उनसे दूषित जल निकल रहा है। इतना ही नहीं, रात्रि में प्रकाश के लिए लगाई गई सोलर लाइटें भी शो पीस बनी हुई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में अंधेरा पसरा रहता है।सड़कों के हाल बेहाल, शौचालय भी बदहाल आश्रम तक पहुँचने वाली सड़कें जर्जर स्थिति में हैं, जो पदयात्रियों के लिए बड़ी बाधा साबित हो सकती हैं। साथ ही, स्वच्छता के दावों के स्वच्छता बीच शौचालयों की गंदगी और बदहाली ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। संतों ने दी आंदोलन की चेतावनी श्रृंगी ऋषि आश्रम की इस उपेक्षा से स्थानीय संतों और परिक्रमार्थियों में भारी रोष है। संतों ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि परिक्रमा शुरू होने से पहले व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”परिक्रमा का पहला पड़ाव ही उपेक्षित है। अगर श्रद्धालुओं को पानी और बिजली जैसी बुनियादी चीजें भी नहीं मिलीं, तो यह प्रशासन की बड़ी विफलता होगी। हम चुप नहीं बैठेंगे। स्थानीय संत समाज अधिकारियों का वही पुराना ढर्रा मामले की गंभीरता को लेकर जब खंड विकास अधिकारी (BDO) से संपर्क किया गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह रटा-रटाया जवाब देते हुए कहा कि समस्याओं का संज्ञान लिया गया है और संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल सुधार के लिए अवगत करा दिया गया है। अब देखना यह है कि 3 अप्रैल से पहले प्रशासन की नींद खुलती है या श्रद्धालुओं को इस बदहाली के बीच ही अपनी आस्था की डगर तय करनी होगी।
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स्वच्छता के दावों के स्वच्छता बीच शौचालयों की गंदगी और बदहाली ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।84 कोसी परिक्रमा से पहले व्यवस्थाओं की खुली पोल: पहले पड़ाव श्रृंगी ऋषि आश्रम में पसरी बदहाली, श्रद्धालुओं को इस बदहाली के बीच ही अपनी आस्था की डगर तय करनी होगी, वही संतों ने दी आंदोलन की चेतावनी,।
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पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए….सनातन धर्म में 16 दिन का पितृपक्ष, सबसे संवेदनशील, सबसे सूक्ष्म दिनों का समय माना गया है। गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और मृत्यु के बाद के विज्ञान का ग्रंथ है, वह स्पष्ट कहता है – इन 16 दिनों में आपका शरीर केवल आपका नहीं रहता, आप अपने पितरों के लिए एक “पात्र” बन जाते हैं।
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