प्रदीपकुमारगुप्ता। गोण्डा ब्यूरो रिपोर्ट। देश ही नहीं बल्कि विदेश मे देवीपाटन मंडल गोंडा जनपद का नाम रोशन करने वाली गोंडा की बेटी अर्यमा श्रीवास्तव पर बहुत ही सटीक कहावत “”होनहार बिरवान के होत चिकने पात “”पूर्वजों की इस कहावत को चरित्रार्थ करते हुए मेहनत, हिम्मत और लगन से बड़ी से बड़ी कल्पना साकार होती है। सच्ची लगन तथा सच्चे उद्देश्य से किया हुआ प्रयास कभी निष्फल नहीं जाता है।बिना कठिन परिश्रम के सफलता पाना असंभव है। यह चरितार्थ कर दिखाया शहर के महराज- गंज निवासी अरविंद श्रीवास्तव एवं रोली श्रीवास्तव की पुत्री अर्यमा श्रीवास्तव ने विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद भारत में विदेश के विश्वविद्यालय से मेडिकल की डिग्री लेनेवाले छात्रों को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम (एफएमजीई)पास करना जरूरी होता है।नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन की आंकड़ों के मुताबिक औसतन करीब 20 फ़ीसदी छात्र यह परीक्षा पास कर पाते हैं। विदेश से मेडिकल डिग्री हासिल करने वालों को भारत में प्रेक्टिस करने के लिए यह परीक्षा पास करना जरूरी है। या परीक्षा एनबीई लेती है।अर्यमा ने प्रथम प्रयास में ही मेडिकल काउंसिल के द्वारा आयोजित एफ एम जी ई की परीक्षा पास कर ली। इन्होंने प्राथमिक शिक्षा शहर के प्रतिष्ठित फातिमा स्कूल में की है। इनके पिता शहर के समाज सेवी एवं डायग्नोस्टिक सेंटर के संस्थापक हैं, एवं मां फातिमा स्कूल में शिक्षिका है।परिवारकेसाथ सभी सगे संबंधियों में हर्ष व्याप्त है।और (ashcharychakit live TV news ) आश्चर्यचकित लाइव टीवी न्यूज़ और आश्चर्यचकित राष्ट्रीय हिंदी समाचार पत्र की पूरी टीम और परिवार की तरफ से बिटिया को ढेर सारी शुभकामनाएं दे रहे हैं ।
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विदेश में मेडिकल की शिक्षा फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम (एफ, एम,जी, ई ) प्रथम प्रयास में मेडिकल काउंसिल की परीक्षा पास करने वाली गोंडा की बेटी ने किया गोंडा का नाम रोशन
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पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए….सनातन धर्म में 16 दिन का पितृपक्ष, सबसे संवेदनशील, सबसे सूक्ष्म दिनों का समय माना गया है। गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और मृत्यु के बाद के विज्ञान का ग्रंथ है, वह स्पष्ट कहता है – इन 16 दिनों में आपका शरीर केवल आपका नहीं रहता, आप अपने पितरों के लिए एक “पात्र” बन जाते हैं।
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