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Ashcharychakit live tv news

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जनपद गोण्डा में नई पहल, जनपद न्यायाधीश सहित सभी न्यायाधीशो ने सरकारी वाहनों का उपयोग छोड़ पैदल ही कचहरी पहुंचकर अनूठी मिसाल पेश की। जिला जज दुर्ग नरायन सिंहने बताया कि पेट्रोलियम संकट, ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए न्यायालय परिवार ने यह सामूहिक निर्णय लिया है।

ByPradeepkumargupta

May 20, 2026


     प्रदीप कुमार गुप्ता (editor in chief)                                              देवीपाटन मंडल कार्यालय गोण्डा                                                     ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट                                      गोण्डा में बुधवार को जनपद न्यायाधीश दुर्ग नरायन सिंह सहित सभी जजों ने सरकारी वाहनों का उपयोग छोड़ पैदल ही कचहरी पहुंचकर अनूठी मिसाल पेश की। जिला जज दुर्ग नरायन सिंह सुबह केंद्रीय नाजिर विजय यादव, अर्दली दयाशंकर तिवारी व सुरक्षा कर्मी वीरेंद्र कुमार के साथ पैदल निकले तो आने जाने वाले लोग कौतूहल से देखने लगे। जजों को आम लोगों की तरह सड़क पर पैदल चलते देख हर कोई हैरान रह गया। जिला जज दुर्ग नरायन सिंह ने बताया कि पेट्रोलियम संकट, ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए न्यायालय परिवार ने यह सामूहिक निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सभी जजों के आवास कचहरी के पास हैं, इसलिए छोटी दूरी के लिए वाहनों का प्रयोग बंद कर पैदल चलने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक दिन की पहल नहीं, बल्कि आगे भी न्यायिक अधिकारी पैदल या साइकिल से दफ्तर आने का प्रयास जारी रखेंगे। जनपद न्यायाधीश ने कहा कि लोगों को छोटे-छोटे कार्य पैदल अथवा साइकिल से करने चाहिए, जिससे डीजल पेट्रोल की बचत हो सके। आज अपर जिला जज निर्भय प्रकाश, दानिश हसनैन व मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार सिंह सहित अन्य न्यायिक अधिकारी भी पैदल ही कोर्ट पहुंचे। इस दौरान जनपद न्यायालय के अन्य न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और कर्मचारी मौजूद रहे।


पंडित उमापति त्रिपाठी की 233वीं जयंती पर सम्मान समारोह आयोजित जगद्गुरु स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर को वशिष्ठ सम्मान, आयुष्मान फाउंडेशन को बृजनंदन सम्मानअयोध्या। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि भारत ने पूरी दुनिया को संदेश दिया है कि आतंकवाद किसी भी दशा में स्वीकार नहीं है। हाल ही में विमान में 180 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मच्छार के साहस और सूझबूझ की सराहना करते : डिप्टी सीएम बृजेश पाठक
पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए….सनातन धर्म में 16 दिन का पितृपक्ष, सबसे संवेदनशील, सबसे सूक्ष्म दिनों का समय माना गया है। गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और मृत्यु के बाद के विज्ञान का ग्रंथ है, वह स्पष्ट कहता है – इन 16 दिनों में आपका शरीर केवल आपका नहीं रहता, आप अपने पितरों के लिए एक “पात्र” बन जाते हैं।
सनातनी ध्वजवाहिका सपना गोयल की अगुआई में श्रीराम मंदिर परिसर में हुआ 15वां सामूहिक सुंदरकांड का पाठ – अनंत चतुर्दशी के पावन दिवस पर लखनऊ की तीन सौ महिलाओं ने किया सामूहिक सुंदरकांड का पाठ- सुंदकांड के माध्यम से सुंदर समाज की कामना की गई- सभी सनातनी महिलाएं इस अनुष्ठान में पीतवर्णी साड़ी में शामिल हुईं
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