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Ashcharychakit live tv news

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शिक्षा तंत्र पर लगा ऐसा दाग है जिसे अब फाइलों से नहीं, कार्रवाई से साफ करना होगा।कार्यालय में बाबूराज: साहब बदलते रहे, सत्ता नहीं ! अयोध्या के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में इन दिनों एक नया प्रशासनिक सिद्धांत जन्म ले चुका है,कुर्सी अफसर की, लेकिन सरकार बाबू की!कहने को परीक्षा प्रभारी रविन्द्र नाथ जोशी हैं, लेकिन विभागीय गलियारों में चर्चा किसी और की है।आरोप तो यहां तक हैं कि चयन वेतनमान, प्रोन्नत वेतनमान और नियुक्तियों के रास्ते में फाइलें कम और कथित ‘रेट लिस्ट’ ज्यादा चर्चा में रहती है। यदि यह सब गलत है तो जांच क्यों नहीं?

ByPradeepkumargupta

Jun 7, 2026


        प्रदीप कुमार गुप्ता (editor in chief)                                    रूबी सोनी (district head Ayodhya)                                                       लखनऊ महानगर कार्यालय                                                       ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट                  अयोध्या के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में इन दिनों एक नया प्रशासनिक सिद्धांत जन्म ले चुका है,कुर्सी अफसर की, लेकिन सरकार बाबू की!कहने को परीक्षा प्रभारी रविन्द्र नाथ जोशी हैं, लेकिन विभागीय गलियारों में चर्चा किसी और की है। फाइलें किस टेबल पर रुकेंगी, किसकी सांसें अटकेंगी और किसका काम दौड़ेगा,इसकी कथित पटकथा किसी और मेज पर लिखी जा रही है। शासन कहता है कि मृतक आश्रित नियुक्ति 21 दिन में होनी चाहिए। लेकिन अयोध्या का जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय शायद किसी दूसरे ग्रह का प्रशासनिक मॉडल चला रहा है। यहां 21 दिन का आदेश फाइल में रहता है और 3-3 महीने की आपत्तियां आवेदकों की किस्मत में लिख दी जाती हैं। जिस परिवार का कमाने वाला सदस्य दुनिया छोड़ चुका हो, उसे संवेदना नहीं, आपत्तियों का पुलिंदा पकड़ाया जाता है।सबसे दिलचस्प कहानी उस लिपिक की है जो लगभग पांच साल से एक ही सीट पर जमे होने की चर्चा में है। सरकारी व्यवस्था में जहां कर्मचारियों के तबादले नियमित प्रक्रिया माने जाते हैं, वहां एक सीट से ऐसा प्रेम आखिर क्यों? यह सवाल अब शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच खुलकर पूछा जाने लगा है। आरोप तो यहां तक हैं कि चयन वेतनमान, प्रोन्नत वेतनमान और नियुक्तियों के रास्ते में फाइलें कम और कथित ‘रेट लिस्ट’ ज्यादा चर्चा में रहती है। यदि यह सब गलत है तो जांच क्यों नहीं? और यदि सही है तो कार्रवाई क्यों नहीं? आउटसोर्सिंग नियुक्तियों पर भी सवाल कम नहीं हैं। आरोप है कि विद्यालयों में कुछ ऐसे चेहरे पहुंच गए हैं जिनकी योग्यता से ज्यादा उनकी रिश्तेदारी मजबूत है।प्रधानाचार्य आदेश दें तो जवाब मिलता है,पहले ऊपर बात कर लीजिए।अयोध्या का शिक्षा विभाग इन दिनों शिक्षा से कम और व्यवस्था के उस मॉडल से ज्यादा चर्चा में है, जहां फाइलें शासनादेश देखकर नहीं, बल्कि टेबल देखकर चलती हैं।जनता पूछ रही है,21 दिन का आदेश 90 दिन में कैसे बदल जाता है? एक ही कर्मचारी के इर्द-गिर्द इतनी शक्ति क्यों केंद्रित है? वर्षों से लंबित शिकायतों का सच आखिर क्या है?और सबसे बड़ा सवाल जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में निर्णय शासन करता है या कोई अदृश्य दरबार अगर आरोप झूठे हैं तो जांच कराकर सबको चुप करा दीजिए। लेकिन यदि आरोपों में सच्चाई का एक प्रतिशत भी है, तो यह सिर्फ एक बाबू की कहानी नहीं, पूरे शिक्षा तंत्र पर लगा ऐसा दाग है जिसे अब फाइलों से नहीं, कार्रवाई से साफ करना होगा।


पंडित उमापति त्रिपाठी की 233वीं जयंती पर सम्मान समारोह आयोजित जगद्गुरु स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर को वशिष्ठ सम्मान, आयुष्मान फाउंडेशन को बृजनंदन सम्मानअयोध्या। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि भारत ने पूरी दुनिया को संदेश दिया है कि आतंकवाद किसी भी दशा में स्वीकार नहीं है। हाल ही में विमान में 180 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मच्छार के साहस और सूझबूझ की सराहना करते : डिप्टी सीएम बृजेश पाठक
पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए….सनातन धर्म में 16 दिन का पितृपक्ष, सबसे संवेदनशील, सबसे सूक्ष्म दिनों का समय माना गया है। गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और मृत्यु के बाद के विज्ञान का ग्रंथ है, वह स्पष्ट कहता है – इन 16 दिनों में आपका शरीर केवल आपका नहीं रहता, आप अपने पितरों के लिए एक “पात्र” बन जाते हैं।
सनातनी ध्वजवाहिका सपना गोयल की अगुआई में श्रीराम मंदिर परिसर में हुआ 15वां सामूहिक सुंदरकांड का पाठ – अनंत चतुर्दशी के पावन दिवस पर लखनऊ की तीन सौ महिलाओं ने किया सामूहिक सुंदरकांड का पाठ- सुंदकांड के माध्यम से सुंदर समाज की कामना की गई- सभी सनातनी महिलाएं इस अनुष्ठान में पीतवर्णी साड़ी में शामिल हुईं
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