प्रदीप कुमार गुप्ता (editor in chief) रूबी सोनी (district head Ayodhya) लखनऊ महानगर कार्यालय ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट
अयोध्या के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में इन दिनों एक नया प्रशासनिक सिद्धांत जन्म ले चुका है,कुर्सी अफसर की, लेकिन सरकार बाबू की!कहने को परीक्षा प्रभारी रविन्द्र नाथ जोशी हैं, लेकिन विभागीय गलियारों में चर्चा किसी और की है। फाइलें किस टेबल पर रुकेंगी, किसकी सांसें अटकेंगी और किसका काम दौड़ेगा,इसकी कथित पटकथा किसी और मेज पर लिखी जा रही है। शासन कहता है कि मृतक आश्रित नियुक्ति 21 दिन में होनी चाहिए। लेकिन अयोध्या का जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय शायद किसी दूसरे ग्रह का प्रशासनिक मॉडल चला रहा है। यहां 21 दिन का आदेश फाइल में रहता है और 3-3 महीने की आपत्तियां आवेदकों की किस्मत में लिख दी जाती हैं। जिस परिवार का कमाने वाला सदस्य दुनिया छोड़ चुका हो, उसे संवेदना नहीं, आपत्तियों का पुलिंदा पकड़ाया जाता है।सबसे दिलचस्प कहानी उस लिपिक की है जो लगभग पांच साल से एक ही सीट पर जमे होने की चर्चा में है। सरकारी व्यवस्था में जहां कर्मचारियों के तबादले नियमित प्रक्रिया माने जाते हैं, वहां एक सीट से ऐसा प्रेम आखिर क्यों? यह सवाल अब शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच खुलकर पूछा जाने लगा है। आरोप तो यहां तक हैं कि चयन वेतनमान, प्रोन्नत वेतनमान और नियुक्तियों के रास्ते में फाइलें कम और कथित ‘रेट लिस्ट’ ज्यादा चर्चा में रहती है। यदि यह सब गलत है तो जांच क्यों नहीं? और यदि सही है तो कार्रवाई क्यों नहीं? आउटसोर्सिंग नियुक्तियों पर भी सवाल कम नहीं हैं। आरोप है कि विद्यालयों में कुछ ऐसे चेहरे पहुंच गए हैं जिनकी योग्यता से ज्यादा उनकी रिश्तेदारी मजबूत है।प्रधानाचार्य आदेश दें तो जवाब मिलता है,पहले ऊपर बात कर लीजिए।अयोध्या का शिक्षा विभाग इन दिनों शिक्षा से कम और व्यवस्था के उस मॉडल से ज्यादा चर्चा में है, जहां फाइलें शासनादेश देखकर नहीं, बल्कि टेबल देखकर चलती हैं।जनता पूछ रही है,21 दिन का आदेश 90 दिन में कैसे बदल जाता है? एक ही कर्मचारी के इर्द-गिर्द इतनी शक्ति क्यों केंद्रित है? वर्षों से लंबित शिकायतों का सच आखिर क्या है?और सबसे बड़ा सवाल जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में निर्णय शासन करता है या कोई अदृश्य दरबार अगर आरोप झूठे हैं तो जांच कराकर सबको चुप करा दीजिए। लेकिन यदि आरोपों में सच्चाई का एक प्रतिशत भी है, तो यह सिर्फ एक बाबू की कहानी नहीं, पूरे शिक्षा तंत्र पर लगा ऐसा दाग है जिसे अब फाइलों से नहीं, कार्रवाई से साफ करना होगा।
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शिक्षा तंत्र पर लगा ऐसा दाग है जिसे अब फाइलों से नहीं, कार्रवाई से साफ करना होगा।कार्यालय में बाबूराज: साहब बदलते रहे, सत्ता नहीं ! अयोध्या के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में इन दिनों एक नया प्रशासनिक सिद्धांत जन्म ले चुका है,कुर्सी अफसर की, लेकिन सरकार बाबू की!कहने को परीक्षा प्रभारी रविन्द्र नाथ जोशी हैं, लेकिन विभागीय गलियारों में चर्चा किसी और की है।आरोप तो यहां तक हैं कि चयन वेतनमान, प्रोन्नत वेतनमान और नियुक्तियों के रास्ते में फाइलें कम और कथित ‘रेट लिस्ट’ ज्यादा चर्चा में रहती है। यदि यह सब गलत है तो जांच क्यों नहीं?
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माँ बाराही देवी की पावन धरती पर विकास कार्यों को नई गति दी जा रही है और सरकार गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग के उत्थान के लिए लगातार कार्य कर रही है।कानून व्यवस्था के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख दोहराते हुए कहा कि प्रदेश में अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। गोण्डा जनपद के दौरे के दौरान विकास और जनकल्याण से जुड़ी 262 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग ₹516 करोड़ बताई गई है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र, प्रतीकात्मक चेक और स्वीकृति-पत्र वितरित किए।
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