भारतीय संविधान दिवस बड़े धूमधाम से कलेक्ट्रेट सभाकर में मनाया गया कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने करते हुए अपने संबोधन में कहा भारत के संविधान पर गर्व है और भारत के सभी नागरिक होने का गौरव प्राप्त है हम सभी को भारत के. संविधान पर गर्व है इसी कार्यक्रम के बीच में उत्तर प्रदेश शासन के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने लोक भवन लखनऊ से संविधान की उद्देशिका कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी देखा गया लाइव प्रसारण के उपरांत गोंडा जनपद के जिलाधिकारी डॉ नेहा शर्मा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अधिकारियों ने
डॉ भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण किया और पुष्पांजलि अर्पित की साथी जिलाधिकारी ने वहां पर उपस्थित सही अधिकारियों व कर्मचारियों को शपथ दिलाई गई कि”” हम सत्य निष्ठा से प्रतिज्ञा करते हैंकि भारत के संविधान में दिए गए मूल कर्तव्यों का पालन करेंगे संवैधानिक आदेशों संस्थाओं राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय प्रतीकों का आदर करेंगे देश की संप्रभुता अखंडता की रक्षा करेंगे महिलाओं का सम्मान करेंगे हिंसा से दूर रहकर बंधुता बढ़ाएंगे सामाजिक सांस्कृतिक का संवर्धन हुआ पर्यावरण संरक्षण करेंगे वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करेंगे सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करेंगे व्यक्तिगत व सामाजिक गतिविधि मैं उत्कृष्ट बनेंगे सबको शिक्षा के अवसर प्रदान करेंगे एवं स्वतंत्रता आंदोलन के आदर्शों को बढ़ावा देंगे,भारत के संविधान की आत्मा है उद्देशिका को अंगीकृत और आत्मप्रीत करते हैं तो समझ लीजिए”” कि हमने पूर्ण संविधान को ही अंगीकृत कर लिया है। जिलाधिकारी ने कहा संविधान हर प्राणी के लिए संभव रखता हैं। सभी को सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय दिलाता है।
सभी को अपने विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है। सभी नागरिकों को अवसर और प्रतिष्ठा प्रदान करता है,समापन कार्यक्रम में जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने उपस्थित सभी अधिकारी कर्मचारी और जनपद वासियों को संविधान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी।
भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहब डॉभीमराव अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान पर भारत के सभी नागरिक को को गौरव आत्मीय विश्वास के साथ मनाया संविधान दिवस कलेक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों कर्मचारियों को जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने दिलाई शपथ
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पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए….सनातन धर्म में 16 दिन का पितृपक्ष, सबसे संवेदनशील, सबसे सूक्ष्म दिनों का समय माना गया है। गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और मृत्यु के बाद के विज्ञान का ग्रंथ है, वह स्पष्ट कहता है – इन 16 दिनों में आपका शरीर केवल आपका नहीं रहता, आप अपने पितरों के लिए एक “पात्र” बन जाते हैं।
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