• Mon. Jun 1st, 2026

Ashcharychakit live tv news

Hindi news, हिंदी न्यूज़ , Hindi Samachar, हिंदी समाचार,Ashcharychakit live tv news

अयोध्या की जिला जेल: फरारी का अड्डा या सुरक्षा की पोलकारण मत पूछिए, तरीका बता देंगे”। ये बयान खुद इस बात की तस्दीक करता है कि सिस्टम अपराध से ज्यादा अपराधियों को बचाने में जुटा है।(विशेष चार नंबर बैरक: फरारी का अड्डा)जिला जेल के विशेष चार नंबर बैरक से दो कैदी फरार हुए।डीआईजी जेल शैलेंद्र कुमार मैत्री ने जो कहा, वो हैरान करने वाला है

ByPradeepkumargupta

Jan 30, 2026


     प्रदीप कुमार गुप्ता (एडिटर इन चीफ )                                                   अरविंद कुमार गुप्ता (एडिटर)                                                         लखनऊ महानगर कार्यालय                                             ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट                                 अयोध्या की जिला जेल: फरारी का अड्डा या सुरक्षा की पोल अयोध्या की जिला जेल से दो कैदियों के फरार होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासन का बयान आया है, लेकिन जवाबों से ज्यादा सवाल खड़े हो रहे हैं। डीआईजी जेल शैलेंद्र कुमार मैत्री ने जो कहा, वो हैरान करने वाला है—”कारण मत पूछिए, तरीका बता देंगे”। ये बयान खुद इस बात की तस्दीक करता है कि सिस्टम अपराध से ज्यादा अपराधियों को बचाने में जुटा है।(विशेष चार नंबर बैरक: फरारी का अड्डा)जिला जेल के              विशेष चार नंबर बैरक से दो कैदी फरार हुए। ‘विशेष’ इसलिए कि वहां ईंटें खुद-ब-खुद कमजोर हो जाती हैं, रोशनदान कैदियों को बाहर जाने का इशारा करता है, और जेल के भीतर 25 फीट का बांस, 30 फुट की सरिया और कंबल ऐसे मिलते हैं जैसे राशन कार्ड पर जारी होते हों। ये सब देखकर लगता है कि जेल प्रशासन            कैदियों को फरारी का प्रशिक्षण दे रहा था, न कि सजा काटने के लिए रख रहा था।(जुगाड़ की कहानी)कैदियों ने ईंट तोड़ी, कंबल की रस्सी बनाई, बांस-सारिया से सीढ़ी तैयार की, और बाउंड्रीवाल फांदकर फरार हो गए। ये कोई एनसीसी कैंप का एथलीट नहीं, बल्कि अपराधी थे जिन्हें सजा काटनी थी। सवाल ये है कि जेल में बांस कहां से आया? सरिया किस विभाग ने सप्लाई की? कंबल कैदियों के लिए था या फरारी पैकेज का हिस्सा?सिस्टम की जुगलबंदीअधिकारी कह रहे हैं—”कारण नहीं बताइए, कैसे हुआ            बस वही सुन लीजिए”। यानी कैदी भागे—ये घटना है, कैसे भागे—ये उपलब्धि है। सिस्टम आज भी जांच में नहीं, जवाबों की जुगलबंदी में व्यस्त है। अयोध्या की जिला जेल अब जेल नहीं रही, यह ‘फरारी प्रशिक्षण केंद्र’ बन चुकी है—जहां से निकलने के लिए अपराध नहीं, बस थोड़ी ईंट, थोड़ा बांस और ढेर सारा सिस्टम पर भरोसा चाहिए।निष्कर्ष ये मामला सिर्फ दो कैदियों के फरार होने का नहीं है, बल्कि सिस्टम की पूरी पोल खोल देता है। अगर जेल ही सुरक्षित नहीं, तो न्याय कहां से मिलेगा? अब देखना ये है कि क्या प्रशासन जवाबदेही तय करेगा, या फिर जुगाड़ से फरारी का ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा?


गोण्डा जनपद में आखिर ऐसा क्या हुआ कि 29 ग्राम पंचायत सचिवों का एक साथ ट्रांसफर कर दिया गया,पंचायत विभाग को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने पूरे जनपद के 16 ब्लॉकों में चर्चा छेड़ दी है। जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा विभिन्न विकास खंडों में लंबे समय से तैनात 29 पंचायत सचिवों का स्थानांतरण कर दिया गया है। वहीं फर्जी अंकपत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप में एक सफाई कर्मी को निलंबित कर दिया गया है।
श्रमजीवी पत्रकार यूनियन शाखा गोण्डा के तत्वाधान में विचार गोष्ठी एवं वरिष्ठ पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों तथा वरिष्ठ पत्रकारों ने पत्रकारिता की चुनौतियों, निष्पक्षता और सामाजिक जिम्मेदारियों पर विचार व्यक्त किए। इस दौरान 60 वर्ष की आयुपूर्ण कर चुके 11 वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा गया। पत्रकारों की कलम गरीब और वंचितों को न्याय दिलाने के लिए चले”: एसपी विनीत जायसवाल
दरगाह पर लगा सरकारी ताला
error: Content is protected !!