Neha Singh/ Pradeep Gupta अयोध्या Ayodhya Dham। ब्यूरो कार्यालय प्रमुख की खास रिपोर्ट अयोध्या महानगर क्षेत्र अंतर्गत दर्शन नगर क्षेत्र में उधारी दिया हुआ पैसा ना मिलने पर भोला गुप्ता नाम के युवक ने होम स्टे के कमरे में जहर खाकर दी जान।अयोध्या कोतवाली के दर्शननगर स्थित माधव होम स्टे में दी जान। छोड़ा सुसाइड नोट।सुसाइड नोट में लिखा।दर्शननगर के ही *विनायक गेस्ट हाउस* के मालिक शिवकुमार मौर्य ने चार लाख रुपये लिया था उधार। वापस न करने पर जहर खाकर दे रहा हूं जान। होम स्टे के लिए ब्रोकर एजेंट का काम करता था मृतक भोला गुप्ता।होम स्टे के लिए लाता था एक से बढ़कर एक कस्टमर, यात्री टूरिस्ट। थाना महाराजगंज के भदौली गांव का रहने वाला था मृतक भोला गुप्ता। पुलिस ने शिवकुमार मौर्य को लिया कस्टडी में, उनसे कर रही पूछताछ।अभी इससे पूर्व भी गौरीशंकर गेस्ट हाउस में भी प्रेमी ने प्रेमिका को गोली मारकर हत्या कर दी थी, फिर खुद को गोली मारा था। अयोध्या के गेस्ट हाउस, इन, सराय, धर्म शाला, होम स्टे में आजकल अपराध बढ़ रहे है। कुछ में अवैध, अनैतिक और गलत काम आजकल खूब हो रहा है। ये सब नियम कानून का पूरी तरह से पालन नहीं करते है, जुगाड़ और वर्तमान सिस्टम से चलाते है अपना काम, इसके कारण होता है आए दिन अपराध और मौत का तांडव को रोकने में शासन प्रशासन द्वारा की जा रही है जम के अवैध वसूली होमस्टे के नाम पर ग्राहकों को हर प्रकार की सुविधा होम स्टे मालिकों के द्वारा और उनके करिंदों द्वारा दूरदराज से राम दर्शन के लिए आने वाले यात्रियों को खुलेआम सारे शाम खुला खेल फर्रुखाबाद की तर्ज पर अवैध व्यापार का धंधा फल फूल रहा है जिस पर शासन और प्रशासन की नकेल कसने की बजाय संलिप्त साफ नजर आ रही है,
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खुला खेल फर्रुखाबाद की तर्ज पर अयोध्या धाम और अयोध्या के आसपास क्षेत्र में अपने घरों को होमस्टे में तब्दील करने वालों के मौत का तांडव रुकने का नाम नहीं ले रहा हैअभी पूर्व में ही गौरी शंकऱ होम स्टे एक प्रेमिका प्रेमी जोड़े ने गोली मारकर हत्या कर ली जिसकी गुच्ची अभी तक सुलझी ही नहीं थी वहीं दूसरी घटना विनायक गेस्ट हाउस में भोला गुप्ता ने जहर खा कर दी जान, लिखा सुसाइड नोट ?
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पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए….सनातन धर्म में 16 दिन का पितृपक्ष, सबसे संवेदनशील, सबसे सूक्ष्म दिनों का समय माना गया है। गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और मृत्यु के बाद के विज्ञान का ग्रंथ है, वह स्पष्ट कहता है – इन 16 दिनों में आपका शरीर केवल आपका नहीं रहता, आप अपने पितरों के लिए एक “पात्र” बन जाते हैं।
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