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बारह-रबी- उल -अव्वल का चांद निकलते ही बाजारों में बढ़ी रौनक


इस्लामी झंडियों और बिजली के कुमकुमों से सज गईं दुकानें

रिपोर्ट – शाहीन बानो
सादुल्लाह नगर/बलरामपुर

सादुल्लानगर पूरी दुनिया के लिए रहमत बनकर आए अल्लाह के आखिरी नबी हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश की खुशियां बारह- रबी -उल -अव्वल 15 सितंबर की रात व 16 सितंबर दिन में मनाया जाएगा। इसको लेकर मुस्लिम समाज में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस्लामी झंडो की बिक्री बढ़ गई है। बाजारों में रौनक बढ़ गई है। नगर के प्रमुख मार्गों पर बिजली के कुमकुमों से रोशनी करने झंडियों से सजाने की तैयारियां शुरू कर दी गई है।

बताते चलें की इस्लामिक कैलेंडर के तिसरी महीने रबी -उल- अव्वल की 12 तारीख को यानी 15 सितंबर की रात व 16 सितंबर दिन को अल्लाह के प्यारे नबी मोहम्मद साहब का योमे पैदाइश (जन्मदिन) मनाया जाएगा। मरकाजी जुलूस के मीडिया प्रभारी अलहाज करी शरफुद्दीन खान हशमती ने लोगों को रबी उल अव्वल शरीफ की मुबारकबाद देते हुए बताया कि बारह-रबी- उल -अव्वल का पर्व इस्लाम धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण दिन माना गया है। इस दिन को अल्लाह की इबादत का खास दिन माना जाता है।

इस दिन को मुस्लिम समाज के लोग घरों और मस्जिदों को जा कर पूरी रात जागकर अपने आका हुजूर सरवरे कायनात पर दरूदो सलाम पेश करते हैं और कुरान पाक की तिलावत करते हैं। भोर में कब्रिस्तानों पर जाकर अपने पूर्वजों की कब्र पर फातिहा पढते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मुस्लिम समाज में सभी त्योहारों में बारह- रबी- उल- अव्वल का महत्व सबसे अधिक माना गया है ।घरों पर इस्लामी झंडा लगाने के साथ -साथ बिजली की रंग बिरंगी झालरों से मस्जिदों को भी रोशन किया जाता है । उन्होंने कहा कि हजरत मोहम्मद स0साहब ने पूरी दुनिया के लोगों को यह संदेश दिया की आपसी भाईचारा कायम रखना और सभी के दुख सुख में बराबर साथ रहना यही इस्लाम धर्म है। साथ ही लोगों को शिक्षा हासिल करने पर भी विशेष बल दिया गया है।


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