प्रदीप कुमार गुप्ता (editor in chief ) लखनऊ महानगर कार्यालय ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने वाला कलाम का सिपाही “पत्रकार” से अभद्रता के साथ पेश आने पर पुलिस विभाग का कोई भी कर्मचारी बक्सा नहीं जाएगा उनके ऊपर भी हो सकता है वी यन एस एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृतअगर किसी पत्रकार के साथ पुलिसकर्मी अभद्रता, गाली-गलौज, धमकी, मारपीट या अवैध रूप से हिरासत में लेने जैसी कार्रवाई करते हैं, तो उनके खिलाफ भी आपराधिक मुकदमा दर्ज हो सकता है। वर्दी कानून से ऊपर नहीं है और कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत होती है।किन स्थितियों में कौन-सी धाराएँ गाली-गलौज/अपमानBNS धारा 352 – जानबूझकर अपमान कर शांति भंग करने की नीयत से उकसाना।BNS धारा 296 – सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्द/कृत्य।धमकी देने परBNS धारा 351 – आपराधिक डराना-धमकाना।धक्का-मुक्की या मारपीटBNS धारा 115/117 – साधारण या गंभीर चोट (चोट की प्रकृति पर निर्भर)।BNS धारा 131 – हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।अवैध हिरासत/रोकनाBNS धारा 127 – गलत तरीके से रोकना।BNS धारा 126 – गलत तरीके से कैद करना।अधिकार का दुरुपयोग (लोक सेवक द्वारा)BNS धारा 220 (पूर्व IPC 166) – कानून की अवहेलना कर नुकसान पहुँचाना।BNS धारा 221 (पूर्व IPC 167) – गलत रिकॉर्ड/आदेश बनाकर नुकसान पहुँचाना।खासकर महिला पत्रकार के मामले में BNS धारा 74 – शीलभंग से संबंधित अपराध।BNS धारा 79 – शब्द/हावभाव से मर्यादा का अपमान।शिकायत कहाँ करें,पीड़ित पत्रकार उच्चाधिकारियों (SP/SSP), जिला पुलिस कार्यालय, पुलिस शिकायत प्राधिकरण या न्यायालय में परिवाद दाखिल कर सकते हैं। मानवाधिकार उल्लंघन की स्थिति में राज्य या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाजा भी खटखटाया जा सकता है।कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सबूत—वीडियो, ऑडियो, गवाह और मेडिकल रिपोर्ट—मामले को मजबूत बनाते हैं। स्पष्ट है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस की है, लेकिन यदि कोई पुलिसकर्मी कानून का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ भी विधि सम्मत कार्रवाई संभव है।
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भारतीय संविधान में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने वाले किसी पत्रकार के साथ पुलिसकर्मी अभद्रता, गाली-गलौज, धमकी, मारपीट या अवैध रूप से हिरासत में लेने जैसी कार्रवाई करते हैं, तो उनके खिलाफ भी आपराधिक मुकदमा दर्ज हो सकता है। वर्दी कानून और संविधान से ऊपर नहीं है और कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत होती है।
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