प्रदीप कुमार गुप्ता (editor in chief ) लखनऊ महानगर कार्यालय . ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट
गोण्डा जनपद के अनेक विभागों में कार्यरत स्थाई संविदा कर्मचारी व स्थाई रूप से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारी बने पत्रकार पत्रकार बन कर स्थाई संविदा कर्मचारी व स्थाई रूप से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारी अपने विभाग समेत अन्य विभागों पर जमाये हुए हैं धौंस पत्रकार की हनक से विभागीय अधिकारियों को स्थाई कर्मचारी व स्थाई रूप से सरकारी सेवा में कार्यरत (पत्रकार ) के खिलाफ कार्यवाही करने में हो रही परेशानी स्थाई संविदा कर्मचारी बने पत्रकार के आगे घुटने टेकने को मजबूर दिख रहे विभागीय अधिकारीआखिर कैसे स्थाई संविदा कर्मचारी बने पत्रकार ? पत्रकार बनने पर विभागीय अधिकारियों पर खड़ा हो रहा बड़ा सवाल जब तक स्थाई संविदा कर्मचारियों (पत्रकारों ) पर नही होगी विभागीय कार्यवाही तब तक स्थाई संविदा कर्मचारी (पत्रकार ) पर कार्यवाही करने में विभागीय अधिकारियों को झेलना पड़ेगा मुसीबत जिला प्रशासन से अपील कि जल्द ही स्थाई संविदा कर्मचारियों (पत्रकारों ) की पहचान कर करें कार्यवाही जिले के सभी विभागों में कार्यरत ( पत्रकार ) स्थाई संविदा कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होने के बाद ही पीड़ितों को मिलेगा न्याय सूत्रों कि माने तो स्थाई संविदा कर्मचारी व स्थाई रूप से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारीयों को पत्रकारिता के लिए विभाग से लेना पड़ता है परमिशन बिना विभागीय परमिशन के स्थाई संविदा कर्मचारी कैसे कर रहे पत्रकारिता जिले में बना चर्चा का विषय देवीपाटन मंडल गोण्डा सहित उत्तर प्रदेश सभी जनपदों तहसीलों ब्लॉक को नगर पालिका नगर पंचायत महानगरों ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न विभागों में कार्यरत स्थाई संविदा कर्मचारियों के द्वारा बिना परमिशन के कर रहे पत्रकारिता से जुड़ा मामला ।
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स्थाई संविदा कर्मचारी बने पत्रकार के आगे घुटने टेकने को मजबूर दिख रहे विभागीय अधिकारीआखिर कैसे स्थाई संविदा कर्मचारी बने पत्रकार ?विभागीय अधिकारियों को झेलना पड़ेगा मुसीबत जिला प्रशासन से अपील कि जल्द ही स्थाई संविदा कर्मचारियों (पत्रकारों ) की पहचान कर करें कार्यवाही जिले के सभी विभागों में कार्यरत ( पत्रकार ) स्थाई संविदा कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होने के बाद ही पीड़ितों को मिलेगा न्याय
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पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए….सनातन धर्म में 16 दिन का पितृपक्ष, सबसे संवेदनशील, सबसे सूक्ष्म दिनों का समय माना गया है। गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और मृत्यु के बाद के विज्ञान का ग्रंथ है, वह स्पष्ट कहता है – इन 16 दिनों में आपका शरीर केवल आपका नहीं रहता, आप अपने पितरों के लिए एक “पात्र” बन जाते हैं।
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