रूबी सोनी/ नेहा सिंह राजपूत (district head Ayodhya Dham) अयोध्या धाम कार्यालय फैजाबाद। ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट
अयोध्या के सूचना विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि विभाग “भ्रमण” के नाम पर गुप्त रूप से चुनिंदा पत्रकारों को श्री राम जन्मभूमि के दर्शन कराने की व्यवस्था कर रहा है। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी बताई जा रही है और सीमित पत्रकारों को ही इसमें शामिल किए जाने की बात सामने आ रही है।स्थानीय पत्रकारों के बीच इस व्यवस्था को लेकर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। आरोप यह भी है कि इस सूची में महिला पत्रकारों को शामिल नहीं किया गया, जिससे पत्रकारिता जगत में भेदभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अयोध्या का सूचना विभाग सभी पत्रकारों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने में विफल नजर आ रहा है। अब तक ऐसी कोई परंपरा नहीं रही कि सूचना विभाग इस तरह सीमित और चयनित पत्रकारों को ही विशेष सुविधा उपलब्ध कराए।आलोचकों का कहना है कि जब सरकार पर पहले से समाज में विभाजन के आरोप लगते रहे हैं, ऐसे में भगवान के दर्शन जैसे विषय में भी भेदभाव की आशंका सामने आना चिंता का विषय है। कई पत्रकारों ने सवाल उठाया है कि क्या केवल वही पत्रकार महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं जो सरकार के पक्ष में खबरें प्रकाशित करते हैं।इस पूरे मामले ने अयोध्या के सूचना विभाग की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। पत्रकारों का कहना है कि यदि इस प्रक्रिया को पारदर्शी नहीं बनाया गया और सभी को समान अवसर नहीं दिया गया, तो यह परंपरा भविष्य में एक गलत उदाहरण बन सकती है।
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मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अयोध्या का सूचना विभाग सभी पत्रकारों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने में विफल नजर आ रहा,अयोध्या सूचना निदेशक और सूचना विभाग के विभागीय कर्मचारियों पर उठे सवालिया निशान : चुनिंदा पत्रकारों को राम जन्मभूमि भ्रमण कराने का आरोप , वहीं महिला पत्रकारों किया जा रहा है नजर अंदाज विभाग की कार्यशैली को लेकर पत्रकारों में आक्रोश व्याप्त है
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पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए….सनातन धर्म में 16 दिन का पितृपक्ष, सबसे संवेदनशील, सबसे सूक्ष्म दिनों का समय माना गया है। गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और मृत्यु के बाद के विज्ञान का ग्रंथ है, वह स्पष्ट कहता है – इन 16 दिनों में आपका शरीर केवल आपका नहीं रहता, आप अपने पितरों के लिए एक “पात्र” बन जाते हैं।
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