प्रदीप कुमार गुप्ता (editor in chief ) नेहा सिंह राजपूत district head Ayodhya अयोध्या धाम फैज़ाबाद कार्यालय ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट
(मिल्कीपुर तहसील उप जिला अधिकारी कार्यालय) जिलाधिकारी ने वेतन रोका तो अफसरों को याद आया कि जनता भी कोई चीज होती है!अयोध्या में 23 अधिकारियों पर गिरी गाज, फाइलों में दबी शिकायतों ने खोल दी सिस्टम की पोल अयोध्या महानगर प्रभु श्री राम की नगरी मैं जनता महीनों से आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें दर्ज कर रही थी। उधर कई
(उप जिलाधिकारी मिल्कीपुर ) अफसर शायद यह मानकर बैठे थे कि सरकार की योजनाएं सिर्फ पोर्टल लॉन्च करने तक सीमित हैं, पालन करना जरूरी नहीं। लेकिन इस बार जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी की कलम चली तो पूरे सिस्टम का आराम हराम हो गया।23 अधिकारियों का वेतन रोक दिया गया। कारण ?जनता शिकायत करती रही और साहब लोग शायद यह समझते रहे कि शिकायतकर्ता कोई इंसान नहीं, कंप्यूटर स्क्रीन पर चमकता एक नंबर है।गुस्ताखी माफ सरकार कुछ अफसरों का रवैया ऐसा हो गया था मानो शासन नहीं, वही खुद सरकार हों।फोन नहीं उठाना फरियादी से संपर्क न करना और फाइल में ऐसा निस्तारण चिपका देना कि शिकायतकर्ता 100 प्रतिशत असंतुष्ट!वाह रे अफसरशाही!जनता रोती रही और सिस्टम “निस्तारित” लिखकर सोता रहा। लेकिन इस बार जिलाधिकारी अयोध्या ने साफ बता दिया कि आईजीआरएस कोई मजाक नहीं है। जनता की शिकायतें सरकारी कूड़ेदान में फेंकने के लिए नहीं होतीं। यही वजह है कि मिल्कीपुर एसडीएम से लेकर बीडीओ, बीईओ, सीडीपीओ, तहसीलदार और कई विभागों के अफसरों का वेतन रोक दिया गया। अब मजेदार दृश्य यह है कि जिन दफ्तरों में फरियादी घंटों कुर्सी खोजते थे, वहां अचानक फाइलें तेजी से दौड़ने लगी हैं। कुछ अधिकारियों को तो शायद पहली बार पता चला होगा कि शिकायतकर्ता से बात भी करनी पड़ती है! जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी की कार्रवाई ने यह संदेश साफ कर दिया है कि कुर्सी जनता की सेवा के लिए है, सरकारी अहंकार दिखाने के लिए नहीं। गुस्ताखी माफ सरकार…अगर हर जिले में इसी तरह जवाबदेही तय होने लगे, तो शायद जनता को यह महसूस होने लगे कि सरकार सिर्फ विज्ञापनों में नहीं, जमीन पर भी मौजूद है।
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वाह रे अफसरशाही !जनता रोती रही और सिस्टम “निस्तारित” लिखकर सोता रहा। लेकिन इस बार जिलाधिकारी अयोध्या शशांक त्रिपाठी का बड़ा एक्शन अधिकारियों का आराम हुआ हराम 23 अधिकारियों पर गिरी गाज, फाइलों में दबी शिकायतों ने खोल दी सिस्टम की पोल ने साफ बता दिया कि आईजीआरएस कोई मजाक नहीं है। जनता की शिकायतें सरकारी कूड़ेदान में फेंकने के लिए नहीं होतीं। यही वजह है कि मिल्कीपुर एसडीएम से लेकर बीडीओ, बीईओ, सीडीपीओ, तहसीलदार और कई विभागों के अफसरों का वेतन रोक दिया गया।
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