प्रदीप कुमार गुप्ता (editor in chief ) देवीपाटन मंडल कार्यालय गोण्डा ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट गोण्डा में आखिर ऐसा क्या हुआ कि 29 पंचायत सचिवों का एक साथ ट्रांसफर कर दिया गया? गोण्डा जनपद से पंचायत विभाग को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने पूरे जनपद के 16 ब्लॉकों में चर्चा छेड़ दी है। जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा विभिन्न विकास खंडों में लंबे समय से तैनात 29 पंचायत सचिवों का स्थानांतरण कर दिया गया है। वहीं फर्जी अंकपत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप में एक सफाई कर्मी को निलंबित कर दिया गया है।जारी स्थानांतरण सूची के अनुसार: राजेश कुमार चौधरी को रुपईडीह से हलधरमऊ सुनील सोनकर को वजीरगंज से नवाबगंज जितेंद्र गुप्ता को परसपुर से बेलसर दिनेश कुमार प्रजापति को छपिया से मनकापुर जाह्नवी तिवारी को इटियाथोक से रुपईडीह राकेश मौर्य को हलधरमऊ से कटरा बाजार कीर्ति मौर्य को हलधरमऊ से झंझरी शुभम सिंह को नवाबगंज से बभनजोत पप्पू सिंह यादव को नवाबगंज से मनकापुर शिशिर कुमार को बेलसर से मनकापुर नंदिनी मौर्य को रुपईडीह से इटियाथोक सत्यप्रकाश यादव को परसपुर से नवाबगंज सौरभ पांडेय को तरबगंज से नवाबगंज प्रसूनराज श्रीवास्तव को रुपईडीह से इटियाथोक भेजा गया है।इसके अलावा:ज्योतिका राय को वजीरगंज से रुपईडीह बृज केश मिश्र को बभनजोत से मनकापुर विनय गुप्ता को मनकापुर से नवाबगंज आलोक मिश्र को हलधरमऊ से कटरा बाजार पवन कुमार गौतम को नवाबगंज से वजीरगंज अमित पटेल को नवाबगंज से वजीरगंज उज्जवल यादव को नवाबगंज से वजीरगंज मुकेश राव को झंझरी से हलधरमऊ घनश्याम निषाद को जनपद मुख्यालय से परसपुर अजीत कुमार को जनपद मुख्यालय से हलधरमऊ मालिक राम को बभनजोत से नवाबगंज राम अजोर को बेलसर से मुजेहना श्रद्धा सिंह को मुजेहना से झंझरी अभिषेक सिंह को बेलसर से परसपुर तिलकराम वर्मा को मनकापुर से बेलसर भेजा गया है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…राजस्व ग्राम तेलिया कोट के सफाई कर्मी अनिल कुमार कुरील को निलंबित कर दिया गया है।बताया गया है कि उनके खिलाफ फर्जी अंकपत्र बनवाकर नौकरी हासिल करने की शिकायत की गई थी। मामले की जांच कराई गई और जांच रिपोर्ट मिलने के बाद प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई। अब जिले में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की हो रही है कि एक तरफ लंबे समय से जमे पंचायत सचिवों का तबादला हुआ, तो दूसरी तरफ फर्जी दस्तावेज के आरोप में कार्रवाई भी कर दी गई। आपके अनुसार…क्या वर्षों से एक ही ब्लॉक में तैनात कर्मचारियों का नियमित ट्रांसफर होना चाहिए?क्या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वालों के खिलाफ पूरे प्रदेश में इसी तरह की कार्रवाई होनी चाहिए?क्या पंचायत व्यवस्था में इससे पारदर्शिता बढ़ेगी?
