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Ashcharychakit live tv news

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आज के आधुनिक युग में शिक्षा का महत्व बहुत बढ़ गया है तकनीक और इंटरनेट के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करना आसान हो गया है लेकिन एक शिक्षक का महत्व कभी भी काम नहीं हो सकता है एक शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।डॉ अंजना सिंह असिस्टेंट प्रोफ़ेसर (हिन्दी विभाग)

ByPradeepkumargupta

Sep 8, 2026


                              ( डॉ अंजना सिंह असिस्टेंट प्रोफ़ेसर )                                 (हिन्दी विभाग) जौनपुर                                                                             जौनपुर उत्तर प्रदेश                                जब एक शिक्षक के ज्ञान और संस्कार मिलते हैं तो एक विद्यार्थी का ही नहीं बल्कि एक उज्जवल समाज और राष्ट्र का निर्माण होता है .! आज के आधुनिक युग में शिक्षा का महत्व बहुत बढ़ गया है तकनीक और इंटरनेट के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करना आसान हो गया है लेकिन एक शिक्षक का महत्व कभी भी काम नहीं हो सकता है एक शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है .!! शिक्षक केवल विद्यालय तक ही नहीं सीमित होते हैं ,अपितु जीवन में हमें माता-पिता भाई-बहन गुरु और अनुभवी लोगों से भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है । और जीवन में जो भी हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है, वह किसी न किसी रूप में हमारा शिक्षक ही होता है..! अगर मैं अपनी बात करूं तो मैं बरसों से शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी हूं तो मेरा मानना है कि जिंदगी में जब भी कुछ करें, अपनी पूरी निष्ठा और सच्चे मन से करें; क्योंकि आधे-अधूरे मन से की गई कोशिशें कभी किसी इतिहास या याद का हिस्सा नहीं बन पातीं हैं।जब कर्म में समर्पण और भावनाएं आपस में घुल जाती हैं, तब वह महज एक काम नहीं रहता, एक साधना बन जाता है। और जब बात शिक्षक के सफर की हो, तो यह साधना किसी तपस्या से कम नहीं होती।​एक शिक्षक की दुनिया सिर्फ चार दीवारों, ब्लैकबोर्ड और किताबों तक सीमित नहीं होती। उसका सफर रोज सुबह उस उम्मीद के साथ शुरू होता है कि आज किसी नन्ही आंख के सपने को नया पंख देना है। यह एक ऐसा सफर है जिसमें थकान तो बहुत है, पर रुकने की गुंजाइश नहीं होती। घर की तमाम जिम्मेदारियों, निजी दुखों और चिंताओं को स्कूल के दरवाजे के बाहर ही छोड़कर चेहरे पर एक आश्वस्त मुस्कान सजाना—यही एक सच्चे शिक्षक की सबसे बड़ी ताकत होती है।​एक शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा नहीं कराता, वह कच्ची मिट्टी जैसे कोमल मनों को गढ़ता है। किसी सहमे हुए बच्चे के कंधे पर धीमे से हाथ रखकर कहना कि “तुम कर सकते हो”, किसी की छोटी-सी सफलता पर अपनी जीत जैसी खुशी महसूस करना, और देर रात तक जागकर अगले दिन की तैयारी करना—यह सब किसी औपचारिक ड्यूटी का हिस्सा नहीं, बल्कि उस असीम आत्मीयता का प्रमाण है जो एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों से रखता है।​इस सफर में उंगलियों पर लगी चाक की धूल, रजिस्टरों में दर्ज अनगिनत नाम और साल-दर-साल विदा होते बच्चों की यादें ही एक शिक्षक की असली पूंजी होती हैं। शिक्षक वह दीया है जो खुद को तिल-तिल जलाकर दूसरों की राह रोशन करता है। एक दिन जब उसका तराशा हुआ कोई छात्र समाज में अपनी पहचान बनाता है, तो शिक्षक की आंखें आंसुओं से भीग जाती हैं—वे आंसू उस अनकही मेहनत की सार्थकता का प्रमाण होते हैं जो उसने बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के सालों तक की होती है।​दिल से किया गया हर काम अपनी छाप छोड़ जाता है, और एक शिक्षिका के रूप में मेरा यही प्रयास हमेशा से रहा है और रहेगा। कबीर दास जी ने भी कहा है कि सब धरती कागज करूं लिखनी सब बनराय।सात समुद्र की मसि करूं, गुरु गुण लिखा न जाए …अर्थात :पूरी धरती को कागज बना दो, जंगल की सभी लकड़ियों को कलम और सातों समुद्रों को स्याही बनाकर लिखने पर भी गुरु के गुण नहीं लिखे जा सकते हैं !! एक अच्छा शिक्षक ही एक अच्छे राष्ट्र का निर्माण करता है5 सितंबर को शिक्षक दिवस भारत के महान शिक्षाविद्, दार्शनिक एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।एक शिक्षक केवल कक्षा में विषय नहीं पढ़ाता, बल्कि वह विद्यार्थियों के सपनों को दिशा देता है, उनकी क्षमताओं को पहचानता है और उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है। किसी विद्यार्थी की सफलता के पीछे उसके शिक्षक का मार्गदर्शन, धैर्य और विश्वास अक्सर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।आज हमारे पास इंटरनेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक के माध्यम से ज्ञान के अनेक स्रोत उपलब्ध हैं। लेकिन ज्ञान को सही दिशा देना, उसमें मानवीय मूल्यों को जोड़ना और विद्यार्थी को एक बेहतर इंसान बनाना—यह कार्य आज भी एक शिक्षक ही सबसे प्रभावी ढंग से कर सकता है।विद्यार्थी अपने शिक्षकों के अनुभव और मार्गदर्शन को समझें, उनसे सीखें और उनके द्वारा दिए गए मूल्यों को अपने जीवन में उतारें। शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध केवल कक्षा और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होता; यह विश्वास, सम्मान और सीखने का संबंध है।“गुरु का स्थान जीवन में सबसे ऊँचा होता है, क्योंकि गुरु ही हमें अज्ञानता के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं।”भारत में हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत के महान शिक्षक, दार्शनिक और देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन का मानना था कि एक अच्छा शिक्षक केवल किताबों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि अपने विद्यार्थियों को जीवन में सही दिशा चुनने के लिए प्रेरित करता है। शिक्षक हमारे जीवन में माता-पिता के बाद सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे हमें केवल पढ़ना-लिखना ही नहीं सिखाते, बल्कि अनुशासन, ईमानदारी, मेहनत, जिम्मेदारी और अच्छे संस्कारों का महत्व भी समझाते हैं। एक शिक्षक विद्यार्थी की प्रतिभा को पहचानकर उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है। शिक्षक दिवस विद्यार्थियों के लिए अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और प्रेम व्यक्त करने का अवसर है! आज के बदलते समय में शिक्षक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। इंटरनेट और तकनीक के माध्यम से विद्यार्थियों के पास जानकारी के अनेक स्रोत हैं, लेकिन सही और गलत जानकारी में अंतर समझाने तथा ज्ञान का सही उपयोग करना सिखाने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।अंततः, शिक्षक केवल हमारे वर्तमान को नहीं सँवारते, बल्कि हमारे भविष्य की नींव भी रखते हैं। हमें अपने शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए और उनके द्वारा दी गई शिक्षा एवं संस्कारों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।शिक्षकसभी के जीवन के सच्चे मार्गदर्शक हैं।


सूचना निदेशालय जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश ने राज्य भर के सभी ज़िलों के मान्यता प्राप्त पत्रकारों पर दर्ज मुकदमों का ब्योरा मांगा! 28 जुलाई ये सूची “प्रत्येक दशा” में माँगी गई! किसी बड़ी अंदेशा का इशारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों के ऊपर दर्ज मुकदमों के चलते रद्द हो सकती है
अपराध एवं अपराधियों के विरूद्ध चलाये जा रहे, अभियान के क्रम में थाना वजीरगंज व एसओजी/सर्विलास की संयुक्त टीमों द्वारा नामजद हत्याभियुक्त संदीप सिंह उर्फ सत्येन्द्र सिंह पुत्र स्व0 बद्री सिंह निवासी ग्राम चाचापुरवा दुर्जनपुरघाट थाना वजीरगंज जनपद गोण्डा को चंदापुर की तरफ जाने वाली पक्की सड़क से गिरफ्तार कर उसकी निशादेही पर 01 अदद लोहे का हसिया बरामद किया,पुलिस द्वारा अग्रिम वैधानिक कार्यवाही कर न्यायालय गोण्डा किया रवाना
चाचा ने उजाड़ी भतीजी के मांग का सिंदूर, प्रेम विवाह करना पड़ा युवक को महंगा, पुरानी रंजिश खूनी वारदात में बदल गई। शनिवार देर रात 35 वर्षीय आजाद सिंह का शव सड़क किनारे मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। पुलिस के अनुसार, युवक के गले और पेट पर धारदार हथियार से कई वार किए गए थे। मामले में मृतक के भाई की तहरीर पर नामजद मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने चार टीमें गठित कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
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