वजीरगंज गोंडा, विकास खंड वजीरगंज ब्लॉक परिसर में स्थित बाल विकास परियोजना कार्यालय में भ्रष्टाचार का बोलबाला और घोटाले निडर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा इस परियोजना में बाल विकास परियोजना अधिकारी नवाबगंज रमा सिंह को वजीरगंज का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है
जो लगभग 20 वर्षों से इन्हीं दो क्षेत्र में बाल विकास परियोजना के पद पर कार्यरत है भ्रष्टाचार का यह आलम है कि कहने को आंगनवाड़ी एवं मिनी आंगनवाड़ी मिलकर 166 केंद्र है जिसमें 98% आंगनबाड़ी केंद्र कागजों में संचालित है वजीरगंज परियोजना क्षेत्र में भ्रष्टाचार लूट खसोट का अड्डा बन चुका है विश्वास सूत्रों से पता चला वजीरगंज क्षेत्र अंतर्गत जितने भी आंगनबाड़ी केंद्र हैं सभी कुपोषण के शिकार हो चुके हैं।
बस सीडीपीओ और सुपरवाइजर को पैसा दिया जाता है और केंद्र बंद रहते हैं जिसके चलते भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाई तमाम योजनाएं कागजों में सिमट कर रह गई हैं जिसमें सरकार द्वारा चलाई गई योजनाएं महिलाओं को आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सुपरवाइजर सीडीपीओ के द्वारा किसी प्रकार की जानकारी नहीं दी जाती है पोषण के प्रकार, खाद्य समूह विभिन्न पोषक तत्वों के स्रोत व उनका महत्व लाभ मौसमी फल एवं सब्जियों का महत्व संतुलित आहार कुपोषण प्रकार गर्भवती महिला एवं स्वास्थ्य एवं पोषण देखभाल टीकाकरण कोविद टीकाकरण बाल्यावस्था में वजन वृद्धि नवजात शिशु 0 से 28 दिन कैसे करना है कम वजन के बच्चे को बचाव का परिणाम वृद्धि निगरानी उपकरण 0 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए गृह भ्रमण चेकलिस्ट 2 से 6 मां के बच्चे गृह भ्रमण चेकलिस्ट 6 से 8 माह के बच्चे 9 से 23 माह के बच्चे 2 से 6 वर्ष केक कुपोषित बच्चों कि गृह भ्रमण की सभी चेकलिस्ट इन कार्यत्रियों द्वारा कागजों में ही बना दिया जाता है आलम तो यह है गोद भराई,अन्य प्रशान दिवस, वीएचएसएनडी योजना चेकलिस्ट, बच्चों की लंबाई ऊंचाई की सापेक्ष वजन तालिका, उनके आयु के सापेक्ष वजन तालिका,आयु अनुसार वजन चार्ट जैसे विभिन्न योजनाएं गर्भवती धात्री महिलाओं को जानकारी ही नहीं होती जिसके चलते वर्तमान व भावी पीढ़ी के बौद्धिक विकास वह उनके कार्य क्षमता सही पोषण की जानकारी न होने के कारण असफल परिणाम कागजों के आंकड़ों पर परिलक्षित हो रहे हैं, जहां एक तरह सरकार की मंशा प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों की नवीनतम जानकारियां दी जा रही है वहीं जिले में विभागीय अधिकारियों कर्मचारियों की मिली भगत से वजीरगंज ब्लॉक क्षेत्र अंतर्गत जनपद के 16 ब्लॉकों में भ्रष्टाचार चरम पर विद्यमान है बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, महिला कल्याण बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार उत्तर प्रदेश, महिला एवं बाल विकास विभाग लाखों प्रयास के बाद इस ब्लॉक में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है जिसका कोई पुरसा हाल नहीं है सरकार द्वारा कुपोषित बच्चों को दिए जाने वाला पुष्टाहार जिसमें प्रमुख रूप से चने की दाल, गेहूं की दलिया, रिफाइंड, बच्चों के वजन मशीन, बच्चों के खेलने की सामग्री इस क्षेत्र के कहीं आंगनबाड़ी केंद्र पर सड़ता नजर आ रहे हैं बच्चों में वितरित होने वाला पोषण आहार बाजारों में बिकता नजर आ रहा है। इसी क्रम में बताते चलें कि 1 ग्राम सभा में 1000 से 12 00 आबादी पर एक कार्यकत्रियों की नियुक्ति है पूरे ब्लॉक क्षेत्र में प्रत्येक ग्राम सभा में 6 से 7 आंगनबाड़ी कार्यकत्रिया नियुक्त हैं और पूरे ब्लॉक मैं सहायिकाओं की संख्या लगभग 122 से 125 है, इन्हीं सहायकों में 18 पद रिक्त हैं जिन्हें आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का चार्ज दिया गया है।
आंकड़ों की मानी जाए तो पूरी गोंडा जनपद में 16 ब्लॉकों में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का पद रिक्त है जिसकी नियुक्तियां भी निकल गई। जिसकी अंतिम तिथि 15 नवंबर थी ऑनलाइन आवेदन की आंकड़ों की माने तो पूरे जिले में 8200 से 8500 लगभग आवेदन किया गया है। वजीरगंज बाल विकास परियोजना कार्यालय पर दो सुपरवाइजर,एक कनिष्ठ लिपिक,एक ब्लॉक समन्वयक, अतिरिक्त चार्ज पर रमा सिंह बाल विकास परियोजना अधिकारी हैं जिनके आने-जाने की कोई समय सीमा नहीं है
टीम सर्वे के आधार पर जब बाल विकास परियोजना वजीरगंज पहुंची तो वहां पर कनिष्ठ लिपिक एवं ब्लॉक समन्वयक उपस्थित मिले उन्होंने बताया की स्टाफ की कमी की वजह से क्षेत्र भ्रमण नहीं हो पा रहा है। जिसमें एक सुपरवाइजर पूनम त्रिपाठी 31 दिसंबर 2024 को रिटायरमेंट हो जाएगी। और तीन माह से बच्चों में वितरित होने वाला पोषाहार अक्टूबर नवंबर दिसंबर अभी तक नहीं आया। वजीरगंज बाल विकास परियोजना राम भरोसे चल रहीहै।
भ्रष्टाचार व कुपोषण का शिकार बना बाल विकास परियोजना वजीरगंज कागजों में सिमटा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का कार्य
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पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए….सनातन धर्म में 16 दिन का पितृपक्ष, सबसे संवेदनशील, सबसे सूक्ष्म दिनों का समय माना गया है। गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और मृत्यु के बाद के विज्ञान का ग्रंथ है, वह स्पष्ट कहता है – इन 16 दिनों में आपका शरीर केवल आपका नहीं रहता, आप अपने पितरों के लिए एक “पात्र” बन जाते हैं।
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