प्रदीप कुमार गुप्ता( editor in chief ) अरविंद कुमार गुप्ता voice editor देवीपाटन मंडल कार्यालय गोण्डा ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट
गोण्डा में 21.47 करोड़ रुपये के बहुचर्चित बैंक घोटाले में अब बड़ी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। पुलिस ने इस मामले में नामजद करीब 15 आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों को जब्त करने की तैयारी तेज कर दी है। जांच में अब तक करीब 6 करोड़ रुपये की संपत्तियों का आकलन किया गया है, जिसमें लग्जरी गाड़ियां, फ्लैट और जमीन शामिल हैं। यह मामला सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि भरोसे के टूटने का है। जिस बैंक में आम लोग अपनी मेहनत की कमाई जमा करते हैं, वहीं अगर फर्जी दस्तावेज बनाकर करोड़ों रुपये का खेल हो जाए, तो लोगों का सिस्टम पर विश्वास डगमगा जाता है। ऐसे हुआ था पूरा खेल जांच में सामने आया कि बैंक अधिकारियों और कुछ खाताधारकों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार कर ऋण स्वीकृत किए गए। करीब 210 खातों के माध्यम से 21.47 करोड़ रुपये का गबन किया गया। इस पूरे मामले का खुलासा बैंक की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ, जिसके बाद 12 जनवरी 2026 को नगर क्षेत्र में मुकदमा दर्ज किया गया और जांच शुरू हुई। अब जरा उन संपत्तियों की सूची देखिए, जिन पर पुलिस की नजर है,सात आरोपियों की संपत्ति का विवरण पवन पाल इनोवा कार (करीब 30 लाख रुपये) संजना पाल अर्टिगा कार (करीब 10 लाख रुपये), फ्लैट लखनऊ (40 लाख रुपये), फ्लैट बाराबंकी (25 लाख रुपये) जय प्रताप सिंह स्विफ्ट कार (10 लाख रुपये), जमीन अयोध्या (करीब 80 लाख रुपये) राज प्रताप सिंह इनोवा कार (30 लाख रुपये), एसयूवी 700 (20 लाख रुपये), जमीन अयोध्या (करीब 70 लाख रुपये) शिवाकांत वर्मा जमीन गोंडा (करीब 20 लाख रुपये) गीता देवी वर्मा जमीन गोंडा (करीब 6 लाख रुपये) फूल मोहम्मद जमीन गोंडा (करीब 70 लाख रुपये) यानी साफ दिखाई दे रहा है कि आम लोगों के भरोसे से निकला पैसा धीरे-धीरे लग्जरी गाड़ियों और जमीन-जायदाद में बदलता चला गया। अब जानिए किन-किन लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया गया है, आरोपियों की पूरी कुंडली,,पवन पाल तत्कालीन शाखा प्रबंधक, कृष्णा नगर कॉलोनी, अयोध्या अजय कुमार तत्कालीन शाखा प्रबंधक, नरही, लखनऊ सुशील कुमार गौतम तत्कालीन शाखा प्रबंधक, निराला नगर, लखनऊ पवन कुमार तत्कालीन सहायक कैशियर, अयोध्या सुमित्रा पाल खाताधारक, अयोध्या (अब मृतक) संजना सिंह खाताधारक, अयोध्या राज प्रताप सिंह,खाताधारक, अयोध्या जय प्रताप सिंह खाताधारक, अयोध्या फूल मोहम्मद खाताधारक, कोतवाली क्षेत्र, गोण्डा,राघवराम खाताधारक, गोण्डा शिवाकांत वर्मा खाताधारक, गोण्डा रितेंद्र पाल सिंह खाताधारक, गोण्डा गीता देवी वर्मा खाताधारक, गोण्डा दुष्यंत प्रताप सिंह — खाताधारक,गोण्डा मोहम्मद असलम — खाताधारक, करनैलगंज, प्रतीक कुमार सिंह — खाताधारक, करनैलगंज, गोण्डा जांच अधिकारी के अनुसार, इस मामले में पवन पाल, राघवराम, गीता वर्मा, शिवाकांत, मोहम्मद असलम और अजय को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह घोटाला अचानक नहीं हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि कई वर्षों तक संदिग्ध तरीके से ऋण दिए जाते रहे और सिस्टम की कमजोरी का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये का गबन किया गया।अब जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है,क्या सिर्फ संपत्ति जब्त होने से न्याय पूरा हो जाएगा? या फिर उन लोगों को सख्त सजा भी मिलेगी, जिन्होंने आम जनता की जमा पूंजी को खतरे में डाल दिया ? यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सहकारी बैंक गांव और कस्बों के लोगों की आर्थिक रीढ़ माने जाते हैं। किसान, छोटे व्यापारी और आम परिवार अपनी छोटी-छोटी बचत इन बैंकों में जमा करते हैं। अगर ऐसे संस्थानों में ही घोटाले होंगे, तो सबसे ज्यादा नुकसान उसी आम आदमी को होगा।अब कार्रवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है। क्या जांच पूरी पारदर्शिता से होगी? क्या सभी दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलेगी? और क्या भविष्य में ऐसे घोटालों को रोकने के लिए सिस्टम मजबूत बनाया जाएगा?
