प्रदीप कुमार गुप्ता देवीपाटन मंडल ब्यूरो रिपोर्ट गोण्डा उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.
के विक्रम राव के निधन से पत्रकारिता के एक युग का अंत हो गया 1 मई को प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में आदरणीय राव साहब बीमार होने के बाद आए और मैं काफी देर तक उनके पास में बैठा रहा बातचीत हुई उनका एक अलग अंदाज था पत्रकार हितों के लिए चिंतित भी रहते थे इसका उदाहरण 1 मई को जब वह प्रेस क्लब में आए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आदरणीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री मयंकेश्वर सिंह थे उन्होंने मुझसे उनके बारे में जानकारी मांगी जो उपलब्ध कराई गई राव साहब ने माननीय मंत्री जी से अनुरोध किया पत्रकारों की चिकित्सा की व्यवस्था सुनिश्चित कर दें उन्होंने कहा मैं तो एक रेलवे अधिकारी का पति हूं मुझे इलाज की पूरी सुविधाएं मिल रही है लेकिन दूसरे पत्रकारों को ऐसी सुविधा नहीं है आप मुख्यमंत्री जी से पत्रकारों के बेहतर इलाज के लिए बात करें अन्य कई बातें उन्होंने माननीय मंत्री से पत्रकार के हितों को लेकर कही उनकी पूरे देश में शोहरत थी और सबसे अच्छी क्वालिटी जो पत्रकारों में नहीं दिखाई देती वह यह थी की अखबार पढ़ते ही अगर आपकी कोई स्टोरी उनको अच्छी लगी तो तत्काल फोन करके वह बधाई देते थे अपना आशीर्वाद देते थे यह उनका सबसे और अलग अंदाज था जो पत्रकारों के लिए एक प्रोत्साहन और जज्बा पैदा करता था मेरे बीच नहीं रहे लेकिन उनके जज्बे को पत्रकारिता जगत हमेशा याद करेगा मुझे नहीं पता था की 1मई मजदूर दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में राव साहब से मेरी अंतिम मुलाकात होगी मैं बड़े दावे के साथ कह सकता हूं कि पूरे देश में अगर उत्तर प्रदेश की धरती से किसी एक पत्रकार को पूरा मीडिया जगत जानता है तो वह थे आदरणीय के विक्रम राव साहेब मैं पिछले काफी दिनों से देश के अलग-अलग राज्यों का भ्रमण किया और जब भी बाहर जाता था राव साहब के बेटे विश्व देव राव से पूछता था की भाई कर्नाटक जा रहा हूं केरला जा रहा हूं तमिलनाडु जा रहा हूं आंध्र प्रदेश जा रहा हूं पश्चिम बंगाल जा रहा हूं और बहुत सारे राज्यों में जहां मैं जाता था उनसे पूछता था किसी वरिष्ठ पत्रकार का मोबाइल नंबर दो और मुझे मोबाइल नंबर मिलते थे और जब भी मैं राव साहब के रेफरेंस फोन करता था कोई भी राज्य हो विशेष कर दक्षिण राज्यों में बहुत सम्मानजनक रिस्पांस मिलता था और जब भी मैं वहां जाता था तो वरिष्ठतम पत्रकार पूरा सम्मानदेते थे जो चाहता था उसमें पूरा सहयोग करते थे डाटा हो या ऐतिहासिक घटनाक्रम हो तथ्यों के साथ उपलब्ध कराते थे यही नहीं कई स्थानों पर उनके साथ यात्रा भी की और हर पत्रकार राव साहब के साथ अपनी मुलाकातों का जिक्र करता कई वरिष्ठतम पत्रकारों के आवास पर भी दक्षिण भारत के राज्यों में गया राव साहब के साथ चित्र भी उनके ड्राइंग रूम में लगे थे राव साहब इस उम्र में इतने सक्रिय की हर दिन उनका पोस्ट तथ्यों के साथ इतिहास के पन्नों से व्हाट्सएप ग्रुप में पढ़ने को मिलता था ऐसे ऐसे तथ्य और अनुभव अपनी लेखनी में साझा करते थे जो आपको पुस्तकों में नहीं मिलेंगे अभी एक दिन पहले ही एक फोटो आई थी जिसमें राव साहब बेटे के साथ आदरणीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मिलकर अपनी पुस्तक भेंट किए हैं बहुत सक्रिय थे राव साहब के नेतृत्व में वर्ष 2000 में श्रीलंका के एक हफ्ता यात्रा भी की थी बहुत सुखद और यादगार यात्रा थी आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके व्यक्तित्व की छाप हमेशा जीवन में बनी रहेगी उनके साथ बिताए समय और समय-समय पर मिलता रहा आशीर्वाद हमेशा याद रहेगा ऐसे महान शख्सियत को प्रभु अपने चरणों में स्थान दे और परिवार को इस दुख की घड़ी में सहनशक्ति की अपार क्षमता दे ओम शांति
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पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए….सनातन धर्म में 16 दिन का पितृपक्ष, सबसे संवेदनशील, सबसे सूक्ष्म दिनों का समय माना गया है। गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और मृत्यु के बाद के विज्ञान का ग्रंथ है, वह स्पष्ट कहता है – इन 16 दिनों में आपका शरीर केवल आपका नहीं रहता, आप अपने पितरों के लिए एक “पात्र” बन जाते हैं।
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