प्रदीप कुमार गुप्ता/ अनिल श्रीवास्तव लखनऊ प्रदेश कार्यालय ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट
अच्छी और नेक दरिया दिली कार्यों की एक नई पहल की शुरुआत करें वाहन चालकों द्वारा अच्छे नागरिक होने का पालन करते हुए पहले एक्सीडेंटल मासूम और महिला को,अस्पताल छोड़िए, तत्पश्चात अपना कार्य करें,जब पत्नी और बेटी बोलीं, परीक्षा तो अगले वर्ष भी हो जाएगी। दौलत का हप्सी फोर व्हीलर वाहन चालक, टक्कर मारकर, महिला और मासूम को मरणासन्न हालत में छोड़कर, वहीं पास में, अपने घर में घुस गया। साहब! अब तो लगा दो केवल बसाहटों में, जानलेवा रफ्तार मौत रूपी बाहनों पर रोक। धन्यवाद- कर्तव्यरत डॉक्टर अभय कुमारऔर कंपाउंडर अमर कुमार,आप दोनों ही, एक्सीडेंटल को अभय और अमर करते रहिए।। छतरपुर।। कक्षा आठवीं के विद्यार्थियों की कोई छात्रवृत्ति रूपी परीक्षा थी। जिसमें सामान्य वर्ग के विद्यार्थी भी, सम्मिलित होने के पात्र थे। उक्त परीक्षा में सम्मिलित होने हेतु हम पति-पत्नी, अपनी पौत्री को, पीएम श्री विद्यालय क्रमांक 2 छतरपुर छोड़ने जा रहे थे। सागर रोड पर, ललोनी तिराहा के पास,जमुनिया पुल पर, एक मासूम, महिला सहित, खून खच्चर हालत में डले थे, फिर बाहन को आगे बढ़ाने की हिम्मत नहीं हुई, और तत्काल वहां रुक कर, हम दंपति ने पूछा कि, क्या हुआ, पता चला कि, एक दौलत का हप्सी अपने चार पहिया वाहन से इनको कुचलते हुए, इस कॉलोनी में घुस गया है, हमने अपनी बेटी से पूछा, परीक्षा महत्वपूर्ण है कि महिला सहित मासूम को अस्पताल छोड़ना, बेटी ने तपाक से उत्तर दिया पहले, आप इन दोनों को अस्पताल छोड़िए, परीक्षा तो अगले वर्ष भी हो सकती है। तत्काल ही दोनों, मासूम और महिला को परिवार सहित परिवार के बीच में अपने बाहन में बैठाया और इस नियम का पालन करते हुए, वाहन चलाया कि, बाहन की तेज गति, तभी हो, जब स्वयं की जान बच रही हो या दूसरे की बचा रहे हों, तत्काल उसे जिला चिकित्सालय छतरपुर ले गए, जैसे ही चिकित्सा ड्यूटी रूम में पहुंचे, वहां उपस्थित चिकित्सक डॉक्टर अभय सिंह और कंपाउंडर अमर कुमार ने क्षणिक विलंब भी न करते हुए, मासूम और महिला को देखा, जैसे कोई अपने परिवार के सदस्य का उपचार कर रहा हो, ईश्वर का रूप कहे जाने वाले दोनों ही सज्जनों की उपचार में तल्नीता देखकर, उनसे निवेदन किया कि, क्या बेटी को स्कूल छोड़ सकता हूं, उसका पेपर है, तब दोनों ही सज्जन वोले कि, आप निशफिक्र होकर जाइए, आपकी उपस्थिति से भी बेहतर इलाज होगा, इस मासूम और महिला का। दोनों ही व्यक्तियों के यह शब्द सुनकर, लगा कि, जिला चिकित्सालय छतरपुर में आज भी ईश्वर के रूप कहे जाने वाले, कुछ फरिश्ते, जिलाचिकित्सालय छतरपुर में मौजूद हैं,फिर तो ऐसा है, एक मछली सारे तालाब के पानी को गंदा कर देती है,जिससे अछूता न कोई समूह है, न कोई समाज है, और न कोई सिस्टम है। जीवन अनमोल है-बाहन की गति, उतनी ही रखिए, जितनी विपरीत परिस्थिति आने पर, वाहन को नियंत्रित करने की, शरीर में क्षमता हो, साथ ही, किसी के परिवार की खुशियां रोड पर न बिखरें और राह में पड़े एक्सीडेंटल को, चाहे कितना भी महत्वपूर्ण कार्य हो, अपनी यात्रा में विलंब करते हुए, उसे हॉस्पिटाल्स जरूर कराते रहिए -जरूर कराते रहिए।। द्रौपदी(राहगीर) को दुर्घटना से दूर कर के छोड़ेंगे। ऐ समय के दुर्योधन- तुझे चूर-चूर कर छोड़ेंगे।।दया धर्म का मूल है, मानवता का सार, मिले सड़क पर जो घायल, उसे भेजिए तुरंत अस्पताल।राह चलते, यातायात नियमों का पालन करना, न भूलिए- न भूलिए,हां अगर राह में पड़े एक्सीडेंटल को, अस्पताल पहुंचने का नेक कार्य करें,
