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Ashcharychakit live tv news

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लोकतंत्र की मर्यादा पर सवाल, समाजसेवी का प्रशासन पर आरोप, हिंदू सनातन धर्म के पावन पर्व नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर अयोध्या में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। समाजसेवी अर्चना तिवारी ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें उनके ही आवास पर करीब पांच घंटे तक नजरबंद (हाउस अरेस्ट) रखा गया, अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे गंभीर प्रश्न चिन्हप्रशासन की कार्यशैली के विरोध में उन्होंने अब खून से मांग पत्र लिखकर शासन को भेजने की चेतावनी दी है

ByPradeepkumargupta

Mar 19, 2026


     प्रदीप कुमार गुप्ता /अरविंद कुमार गुप्ता                                                लखनऊ महानगर कार्यालय                                                                (रूबी सोनी अयोध्या धाम)                                 ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट                                                                               अयोध्या आज हिंदू सनातन धर्म की पावन पर्व, हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर अयोध्या में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। समाजसेवी अर्चना तिवारी ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें उनके ही आवास पर करीब पांच घंटे तक नजरबंद (हाउस अरेस्ट) रखा गया।अर्चना तिवारी का कहना है कि उन्होंने पहले ही नगर मजिस्ट्रेट को आवेदन देकर राष्ट्रपति को शांतिपूर्ण ढंग से ज्ञापन सौंपने की अनुमति मांगी थी, जिसकी प्राप्ति रसीद भी उनके पास मौजूद है। इसके बावजूद उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा का हवाला देकर उन्हें रोका गया, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा। राष्ट्रपति के प्रस्थान के बाद ही नजरबंदी समाप्त कर दी गई। इसे उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की अनदेखी बताया।समाजसेवी ने कहा कि यदि सुरक्षा कारणों से रोकना आवश्यक था, तो प्रशासन की जिम्मेदारी थी कि किसी अधिकारी को भेजकर ज्ञापन स्वीकार किया जाता। ऐसा न होना प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।अर्चना तिवारी ने अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एक ओर सरकार जनता को सर्वोपरि बताती है, वहीं स्थानीय स्तर पर अधिकारी आम नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को महत्व नहीं दे रहे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने फोन उठाना उचित नहीं समझा।उन्होंने कहा कि यदि किसी आपात स्थिति में भी अधिकारी इसी तरह संपर्क से बाहर रहें, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।अर्चना तिवारी ने स्पष्ट किया कि उनका पांच सूत्रीय मांग पत्र सवर्ण समाज से जुड़े मुद्दों और यूजीसी की विसंगतियों को लेकर था, जिसे लोकतांत्रिक तरीके से प्रस्तुत करना उनका अधिकार है।प्रशासन की कार्यशैली के विरोध में उन्होंने अब खून से मांग पत्र लिखकर शासन को भेजने की चेतावनी दी है। साथ ही मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।यह मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है।


गोण्डा जनपद में आखिर ऐसा क्या हुआ कि 29 ग्राम पंचायत सचिवों का एक साथ ट्रांसफर कर दिया गया,पंचायत विभाग को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने पूरे जनपद के 16 ब्लॉकों में चर्चा छेड़ दी है। जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा विभिन्न विकास खंडों में लंबे समय से तैनात 29 पंचायत सचिवों का स्थानांतरण कर दिया गया है। वहीं फर्जी अंकपत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप में एक सफाई कर्मी को निलंबित कर दिया गया है।
श्रमजीवी पत्रकार यूनियन शाखा गोण्डा के तत्वाधान में विचार गोष्ठी एवं वरिष्ठ पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों तथा वरिष्ठ पत्रकारों ने पत्रकारिता की चुनौतियों, निष्पक्षता और सामाजिक जिम्मेदारियों पर विचार व्यक्त किए। इस दौरान 60 वर्ष की आयुपूर्ण कर चुके 11 वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा गया। पत्रकारों की कलम गरीब और वंचितों को न्याय दिलाने के लिए चले”: एसपी विनीत जायसवाल
दरगाह पर लगा सरकारी ताला
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