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Ashcharychakit live tv news

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लेखपाल पर हमले के चार दिन बाद दर्ज हुई एफ,आई,आर,उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के अध्यक्ष और महामंत्री के हस्तक्षेप पर मुकदमा तो पंजीकृत हो गया लेकिन अपराधी पुलिस की पकड़ से बाहर है माफिया राज पूर्ण रूप से कायम और दबंगो का बोलबाला गोण्डा में सरकारी मशनरी फेल दबंगो और माफियाओं के सामने राजस्व विभाग के जानलेवा  हमला हो रहा है दबंग के सामने प्रशासन नतमस्तक ? सोचने वाली बात…गुस्सा सिस्टम से हो सकता है,लेकिन रास्ता हिंसा नहीं हो सकता।असली जरूरत क्या है ? सिस्टम में सुधार? पारदर्शिता? और जिम्मेदारी तय होना कि न जनता परेशान हो और न ऐसी घटनाएं हों

ByPradeepkumargupta

Mar 19, 2026


                   प्रदीप कुमार गुप्ता (editor in chief )                                     अरविंद कुमार गुप्ता  (voice editor )                                                देवीपाटन मंडल कार्यालय गोण्डा                                     (ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट )                                                उत्तर प्रदेश सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के राज्य में माफिया राज पूर्ण रूप से कायम और दबंगो का बोलबाला गोण्डा में सरकारी मशनरी फेल दबंगो और माफियाओं के सामने राजस्व विभाग के जानलेवा  हमला हो रहा है कानून के आगे नतमस्तक                                         कानून हो रहा है बेबस: लेखपालों को बंधक बनाकर पीटा सरकारी जमीन की जांच करने गए,और खुद ही बंधक बना लिए गए अगर यही हाल रहा,तो कल कोई भी सरकारी अधिकारी मैदान में जाने से डर जाएगा यह मामला गोण्डा जिले के खरगूपुर क्षेत्र का है, जहां दो लेखपाल अवैध कब्जे की जांच और सरकारी जमीन की पैमाइश करने पहुंचे थे।यानी वे अपना काम कर रहे थे,कानून लागू करने गए थे,लेकिन जैसे ही वे मौके पर पहुंचे, माहौल अचानक बदल गया कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया पहले गाली-गलौज, फिर हाथापाई ,फिर खुलकर मारपीट दोनों लेखपालों के मोबाइल फोन छीन लिए गए,बाइक की चाबी निकाल ली गई,और करीब 1 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया विरोध करने पर थप्पड़ मारे गए गोली मारने की धमकी दी गई और सरकारी अभिलेख वहीं फाड़ दिए गए यह सिर्फ मारपीट नहीं थी…यह कानून को सीधी चुनौती थी।पूरा मामला03 नामजद +0 4 अज्ञात आरोपी गंभीर धाराओं में केस दर्ज जांच उच्च स्तर पर जारी लेकिन एक कड़वा सच भी है,जमीन से जुड़े मामलों में अक्सर लोगों के मन में गुस्सा रहता है,कई बार आरोप लगते हैं कि छोटे अधिकारी बिना पैसे काम नहीं करते लोगों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं और सिस्टम पर भरोसा धीरे-धीरे कमजोर होता जाता है इसी गुस्से का नतीजा कई बार ऐसे विस्फोट के रूप में सामने आता है लेकिन,क्या इसका मतलब यह है कि किसी को पीटना सही हो जाता है? क्या कानून को हाथ में लेना सही है? बिल्कुल नहींअगर आज लेखपाल को पीटना “जायज” मान लिया गया,तो कल किसी भी सरकारी कर्मचारी या आम आदमी के साथ यही हो सकता है सोचने वाली बात…गुस्सा सिस्टम से हो सकता है,लेकिन रास्ता हिंसा नहीं हो सकता।असली जरूरत क्या है? सिस्टम में सुधार? पारदर्शिता? और जिम्मेदारी तय होना कि न जनता परेशान होऔर न ऐसी घटनाएं हों।अब आपकी राय जरूरी है,क्या ऐसे मामलों में सिर्फ कार्रवाई काफी है?या फिर पूरे सिस्टम को सुधारने की जरूरत है, क्योंकि चुप रहना,समस्या को और बड़ा बना देता है खरगूपुर थानान्तर्गत गत रविवार को समय लगभग शाम 4 बजे हल्का लेखपाल मनीष कुमार एवं सहयोगी लेखपाल अंकुर कुमार के साथ हुई मार-पीट गाली गलौज, मोबाइल छीनने और बंधक बनाने की घटना के संबंध में आखिरकार चौथे दिन थाना खरगूपुर पुलिस ने एफआईआर दर्ज ही कर लिया। प्राप्त समाचार के अनुसार थाना खरगूपुर अंतर्गत पिपराचौबे गांव में हल्का लेखपाल मनीष कुमार व सहयोगी लेखपाल अकुर कुमार पहुंचे जहां पर गाटा संख्या 231 मि० रकबा 0.210हे0 व चकमार्ग गाटा संख्या 253 रकबा 0.053 हे0 पर जनकलाल तिवारी, राम प्रवेश तिवारी पुत्रगण ज्ञानेंद्र तिवारी व ज्ञानेंद्र तिवारी पुत्र दुर्गा प्रसाद निवासी ग्राम पुरैनिया थाना खरगूपुर के द्वारा अवैध रूप से निर्माण कार्य ग्राम समाज की भूमि पर किया जा रहा था। बताया जाता है कि पहले भी इन्हें निर्माण करने से रोका गया था, परन्तु पुनः निर्माण कार्य करने लगे जिसकी शिकायत दूरभाष पर ग्राम प्रधान आदि के द्वारा किया गया जिसके क्रम में जांच पड़ताल व पैमाईश किया जा रहा था। दीपक मिश्रा उर्फ दीपू अपने पांच अन्य बाहरी व्यक्ति को बुलाकर जाति सूचक शब्द का प्रयोग करते हुए मां बहन की गाली दिए व मोबाइल फोन दोनों लेखपालों का छीन लिए। विरोध करने पर कालर पकड़कर थप्पड़ से मारा और जान से मारने की धमकी भी दिए। जब लेखपाल के द्वारा मोटर साइकिल से जाने का प्रयास किया गया तो गाड़ी की चाभी निकाल लिया गया व दीपक मिश्रा उर्फ दीपू व अन्य पांच लोगों के द्वारा एक घंटे तक घेरा बनाकर बंधक बनाए रखे गया । बहुत प्रयास के बाद मोबाइल व चाभी दिया गया व जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली देते हुए कहा गया कि यदि दोबारा आओगे तो मारकर व काटकर इसी पिलर में गाड़ देंगे। लेखपाल के द्वारा थाना खरगूपुर में दीपक मिश्रा उर्फ दीपू पुत्र राघवेंद्र मिश्रा निवासी ग्राम मनोहरजोत, जनकलाल तिवारी, राम प्रवेश तिवारी पुत्रगण ज्ञानेंद्र तिवारी व ज्ञानेंद्र तिवारी पुत्र दुर्गा प्रसाद निवासी ग्राम पुरैनिया व चार अन्य अज्ञात लोगों के विरुद्ध जमीन पर अवैध कब्जा, धमकी देना, राजस्व अभिलेख फाड़ना, जाति सूचक शब्दों से गाली देना व मारना, सरकारी कर्मचारियों को बंधक बनाना व सरकारी कार्य में बाधा डालना व अन्य समस्त सुसंगत धाराओं में प्राथमिक दर्ज करने का प्रार्थना पत्र घटना के ही दिन दिया गया, लेकिन थाने पर प्राथमिकी दर्ज नहीं किया गया और प्रार्थना पत्र बदलने का दबाव पुलिस द्वारा बनाया जाने लगा परन्तु जब उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के जिला महामंत्री दीपक त्रिपाठी द्वारा अपने लेखपाल पदाधिकारी साथियों और दर्जनों लेखपालों के साथ क्षेत्र अंतर्गत थाना अध्यक्ष से वार्ता करने पर घटना के चौथे दिन अभियोग पंजीकृत हुआ इसी क्रम में लेखपाल संघ के अध्यक्ष महामंत्री ने बताया कि पुलिस प्रशासन द्वारा अभी तक अभियुक्तों को गिरफ्तार नहीं किया गया जो खुलेआम घूम रहे हैं और लेखपालों को जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं अगर समय रहते उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई पूरा उत्तर प्रदेश लेखपाल हर जनपद एवं तहसील के लेखपाल तहसील अध्यक्षों के साथ धरना प्रदर्शन के साथ आमरण अनशन पर बैठेगा। उक्त लेखपाल उत्पीड़न के प्रकरण पर थानाध्यक्ष खरगूपुर शेषमणि पांडेय से बात करने पर उन्होंने बताया कि अभी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। दबिश दी जा रही है, जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जायेगा।

 

 


गोण्डा जनपद में आखिर ऐसा क्या हुआ कि 29 ग्राम पंचायत सचिवों का एक साथ ट्रांसफर कर दिया गया,पंचायत विभाग को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने पूरे जनपद के 16 ब्लॉकों में चर्चा छेड़ दी है। जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा विभिन्न विकास खंडों में लंबे समय से तैनात 29 पंचायत सचिवों का स्थानांतरण कर दिया गया है। वहीं फर्जी अंकपत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप में एक सफाई कर्मी को निलंबित कर दिया गया है।
श्रमजीवी पत्रकार यूनियन शाखा गोण्डा के तत्वाधान में विचार गोष्ठी एवं वरिष्ठ पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों तथा वरिष्ठ पत्रकारों ने पत्रकारिता की चुनौतियों, निष्पक्षता और सामाजिक जिम्मेदारियों पर विचार व्यक्त किए। इस दौरान 60 वर्ष की आयुपूर्ण कर चुके 11 वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा गया। पत्रकारों की कलम गरीब और वंचितों को न्याय दिलाने के लिए चले”: एसपी विनीत जायसवाल
दरगाह पर लगा सरकारी ताला
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