प्रदीप कुमार गुप्ता/ धीरेंद्र सिंह बिसेन देवीपाटन मंडल कार्यालयगोण्डा ब्यूरो प्रमुख की खास रिपोर्ट
गोस्वामी तुलसीदास की जन्मभूमि के समीप, सरयू नदी के पावन तट पर स्थित राजकीय हाई स्कूल रामपुर टेपरा आज किसी परिचय का मोहताज नहीं रह गया है। गोंडा मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर, करनैलगंज तहसील के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्र में स्थित यह विद्यालय वर्ष 2012 में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत स्थापित हुआ था। स्थापना के बाद लंबे समय तक यह विद्यालय बुनियादी सुविधाओं और पर्याप्त शिक्षकों के अभाव से जूझता रहा। एक समय ऐसा भी था जब केवल एक शिक्षक के सहारे पूरी शिक्षण व्यवस्था संचालित हो रही थी, जिससे विद्यालय की शैक्षिक स्थिति लगातार कमजोर होती चली गई।स्थिति तब बदलनी शुरू हुई जब विद्यालय में सामाजिक विज्ञान के शिक्षक समर प्रताप सिंह एवं संस्कृत शिक्षक श्रीकांत वर्मा की नियुक्ति हुई। दोनों शिक्षकों ने विद्यालय की बदहाल दशा को स्वीकार करने के बजाय उसे बदलने का संकल्प लिया। विशेष रूप से शिक्षक समर प्रताप सिंह, जो वर्तमान में राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष भी हैं, ने इस विद्यालय को संवारने के लिए जिस प्रकार का अथक और नि:स्वार्थ प्रयास किया, वह पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है।विद्यालय भवन वर्षों से उपेक्षा का शिकार था। सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में भवन क्षतिग्रस्त हो चुका था, दरवाजे और खिड़कियां टूट-फूट की स्थिति में थीं, शौचालय और पेयजल व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त थी। इन अव्यवस्थाओं का सीधा असर पठन-पाठन पर पड़ रहा था। ऐसे कठिन हालात में शिक्षक समर प्रताप सिंह ने व्यक्तिगत स्तर पर पहल करते हुए ग्राम सभा से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर तक अधिकारियों से पत्राचार किया। उनके सतत प्रयासों का ही परिणाम रहा कि विद्यालय में विद्युत आपूर्ति बहाल हुई, बाउंड्री वॉल का निर्माण पूर्ण हुआ और विद्यालय तक पहुँचने वाली सड़क का कार्य भी प्रगति पर है।विद्यालय के सौंदर्यीकरण और आधारभूत विकास की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य हुए। सबसे पहले शौचालयों की मरम्मत कर उनमें पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की गई। पेयजल के लिए आर.ओ. प्लांट स्थापित किया गया, जिससे विद्यार्थियों को स्वच्छ जल उपलब्ध हो सका। कक्षाओं के दरवाजे-खिड़कियां दुरुस्त कर कक्षाओं को सुव्यवस्थित किया गयाlशिक्षण को रोचक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विद्यालय में एलसीडी टीवी लगवाकर स्मार्ट क्लास की शुरुआत की गई। लगभग दस वर्षों बाद विद्यालय की दीवारों पर प्लास्टर और रंग-रोगन कराया गया, जिससे विद्यालय का वातावरण न केवल आकर्षक हुआ बल्कि विद्यार्थियों में भी नई ऊर्जा का संचार हुआ।शिक्षक समर प्रताप सिंह के प्रयास यहीं तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने विद्यालय में कैरियर हब की स्थापना कर छात्रों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, करियर विकल्पों और भविष्य की योजनाओं से जोड़ने का कार्य किया। किचेन गार्डनिंग के माध्यम से विद्यार्थियों में श्रम, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का भाव विकसित किया गया। विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण, हरियाली और पुष्प वाटिका विकसित कर एक स्वच्छ, शांत और प्रेरक वातावरण तैयार किया गया, जो पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक विकास में भी सहायक सिद्ध हो रहा है।खेलकूद और एक्स्ट्रा करिकुलर गतिविधियों को भी विद्यालय की शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया गया। विद्यार्थियों को खेलों के प्रति जागरूक कर उन्हें शारीरिक रूप से सक्षम बनाने का प्रयास किया गया। समय-समय पर शैक्षिक भ्रमण और टूर आयोजित कर बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान से बाहर निकलकर व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया गया। इन सभी गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव यह हुआ कि विद्यालय में छात्र संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और ग्रामीण परिवेश के गरीब व वंचित परिवारों के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से लाभान्वित होने लगे।विद्यालय के प्रधानाचार्य अरविंद श्रीवास्तव ने शिक्षक समर प्रताप सिंह एवं श्रीकांत वर्मा के इन प्रयासों को “भगीरथ प्रयास” बताते हुए मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। आज यह विद्यालय सरकार द्वारा संचालित मिशन कायाकल्प की जीवंत मिसाल बन चुका है।निस्संदेह, राजकीय हाई स्कूल रामपुर टेपरा की बदली हुई तस्वीर यह सिद्ध करती है कि यदि शिक्षक में संकल्प, संवेदना और सेवा भाव हो, तो सीमित संसाधनों में भी असाधारण परिवर्तन संभव है। शिक्षक समर प्रताप सिंह का यह सराहनीय योगदान न केवल इस विद्यालय के लिए, बल्कि पूरे शिक्षा जगत के लिए एक प्रेरक उदाहरण है, जो यह संदेश देता है कि शिक्षा का वास्तविक कायाकल्प भवन से नहीं, बल्कि शिक्षकों के समर्पण से होता है।
