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Ashcharychakit live tv news

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पत्रकारिता अब लोकतंत्र का चौथा स्तंभ नहीं, सिस्टम का साइलेंसर बन चुकी है।जहां कलमों की धार थी,वहां अब बाइट्स और बैनर की बोली है। मीडिया हाउस अब न्यूज़ रूम नहीं, ‘न्यूज़ ट्रेडिंग कंपनी’ हैं। यहां खबरें नहीं बिकतीं, इश्तेहार बिकते हैं।पत्रकारिता अब जब सत्ता और मीडिया ने एक-दूसरे को गले लगाकर पत्रकारिता का गला घोंट रहे हैं,कभी सुना था सत्ता डरती है कलम से।”पर अब सत्ता कलम खरीद लेती है।

ByPradeepkumargupta

Oct 26, 2025


प्रदीप कुमार गुप्ता /अरविंद कुमार गुप्ता                                            लखनऊ महानगर कार्यालय                                                           ब्यूरो प्रमुख की रिपोर्ट                           आजकल पत्रकारिता नहीं मौन का महोत्सव का कार्यक्रम चलाया जा रहा है कुछ पत्रकार साथी हमारे थाना,कोतवाली, तहसील,जनपद,मंडल, स्तर पर ही नहीं  विधानसभा सदस्य  प्रतिनिधि नगर पंचायत, नगर पालिका, लोकसभा सदस्य प्रतिनिधियौ सच्चाई लिखने के बजाय जी हजूरी में लगे हुए हैं, आज का पत्रकार शासन प्रशासन के इशारों पर पत्रकारिता की जा रही है,जब सत्ता और मीडिया ने एक-दूसरे को गले लगाकर पत्रकारिता का गला घोंट रहे हैं,कभी सुना था सत्ता डरती है कलम से।”पर अब सत्ता कलम खरीद लेती है। और जो नहीं बिकती…उसे देशद्रोही,अराजकतावादी, या विपक्ष का मोहरा बताकर कुचल देती है।आज की पत्रकारिता का हाल ऐसा है कि जो सच लिखता है, वो नोटिस पाता है।जो झूठ लिखता है, वो नोट पाता है। जो सवाल पूछता है, उसका नेटवर्क बंद कर दिया जाता है। जो सिर्फ सत्ता की भाषा बोलता है, उसे “पद्मश्री” और “राज्य अतिथि” बना दिया जाता है।मीडिया हाउस अब न्यूज़ रूम नहीं, ‘न्यूज़ ट्रेडिंग कंपनी’ हैं। यहां खबरें नहीं बिकतीं, इश्तेहार बिकते हैं।पत्रकारिता अब अखबार के पहले पन्ने पर नहीं, प्रेस रिलीज़ के फोल्डर में पड़ी धूल खा रही है। संपादक अब आवाज़ नहीं उठाते, क्योंकि उनके मालिक का टेंडर उसी मंत्री के पास है,जिसके खिलाफ खबर छपनी थी। कभी-कभी लगता है, हम सब पत्रकार नहीं, किराए के संवाददाता बन गए हैं, जो जहां से ज्यादा देगा, वहीं की सच्चाई लिख देंगे। और जो नहीं देगा, उसकी खबर “स्पेस की कमी” में कट जाएगी।अब तो प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी पत्रकार सवाल नहीं पूछते,सेल्फी लेते हैं। सवाल पूछना अब पुराना फैशन है,अब भाईसाहब, आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं” कहना ही नया प्रोटोकॉल है। पत्रकारिता की हत्या किसी एक सरकार ने नहीं की। यह साझा अपराध है सत्ता ने जहर दिया,मालिकों ने गिलास थमाया,और पत्रकारों ने खुशी-खुशी पी लिया।हम सबको यकीन दिला दिया गया है कि *सिस्टम से लड़ना आत्मघाती है। और इसलिए, हमने सच्चाई को ‘ड्राफ्ट’ में सेव कर दिया है। न छापी जाएगी, न डिलीट होगी… बस पड़े-पड़े सड़ती रहेगी। आज जिस चैनल पर “धर्म” और “राष्ट्रवाद” की चीख सुनाई देती है,वहीं कल किसी गरीब की मौत की खबर को “कम TRP” कहकर काट दिया गया था। जो पत्रकार किसानों की आवाज़ बनने निकला था, वो आज स्टूडियो में “कृषि बिल” पर डिबेट कर रहा है, और मेहमानों की गिनती देख रहा है सत्य नहीं, सेगमेंट रेटिंग।सच्चाई यह है पत्रकारिता अब लोकतंत्र का चौथा स्तंभ नहीं, सिस्टम का साइलेंसर बन चुकी है।जहां कलमों की धार थी,वहां अब बाइट्स और बैनर की बोली है। और जब कोई पत्रकार अब भी सच लिखता है, तो बाकी पत्रकार फुसफुसाते हैं “क्यों पंगा ले रहा है भाई…?* क्योंकि आजकल “साहस” को मूर्खता और“समर्पण” को समझदारी कहा जाता है।इतिहास गवाह रहेगा —कि हमने तानाशाही नहीं झेली,तानाशाही को स्पॉन्सर किया।हमने सच्चाई नहीं लिखी,सत्ता के प्रेस नोट को सजाया।लेखक का प्रश्न (दूसरी बार, और आखिरी बार): जब अगली बार कोई पत्रकार मारा जाएगा —तो प्रेस क्लब में शोक सभा होगी या कैन्टीन में “भोजन”?


जैनस इनीशिएटिव्स संस्था के संस्थापक एवं वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज कुमार श्रीवास्तव द्वारा इस वर्ष जरूरतमंद एवं मेधावी बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई। कार्यक्रम के अंतर्गत कुल आठ बच्चों को स्कॉलरशिप दी गई,
उत्तर प्रदेश के देवीपाटन परिक्षेत्र में फर्जी विवेचना करने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। गोण्डा, बहराइच, बलरामपुर, और श्रावस्ती के थानों से जुड़े 13 दरोगा हुए निलंबित विवेचना में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला मजिस्ट्रेट, गोण्डा के अन्तिम आदेश दिनांक 17.01.2026 जिसके द्वारा वाद संख्या 1836/2025 सरकार बनाम विपिन सिंह अन्तर्गत धारा 3(1) उ०प्र० गुण्डा नियंत्रण अधिनियम के प्रकरण में “विवेचनां के आधार पर विपक्षी के विरूद्ध न्यायालय द्वारा जारी कारण बताओं नोटिस दिनांक19.06.2025 की पुष्टी करते हुए उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम 1970 की धारा 3(1) के अधीन विपक्षी विपिन सिंह पुत्र शिवशंकर सिंह निवासी अजबनगर थाना वजीरगंज जनपद गोण्डा को “गुण्डा” घोषित किया गया है, तथा विपक्षी को यह आदेश दिया गया है कि वह आगामी 06 माह की अवधि के लिए जनपद गोण्डा की सीमा से बाहर चला जाय और उक्त अवधि में जनपद की सीमा में बिना पूर्व अनुमति के प्रवेश नहीं करेगा। जिला बदर की नोटिस तामील करते हुए थाना वजीरगंज पुलिस द्वारा विपिन सिंह को जनपद अयोध्या की सीमा में ले जाकर छोड़ गया   
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